दुर्ग सीएचएमओ डॉक्टर जे पी मेश्राम का दो वर्षीय कार्यकाल रहा विवादों से भरा…
विशाखा कमेटी की जॉच के बाद अब तक कार्यवाही अधूरी…
सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ महिला कर्मी से कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप में डॉ.एस के जामगड़े पर दोष सिद्ध पाया गया था…

द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग/रायपुर
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्वास्थ्य विभाग इन दिनों काफी चर्चा में रहा है …
जैसे जैसे दुर्ग सीएचएमओ मुख्य चिकित्सा अधिकारी की सेवानिवृत्ति का समय नजदीक आने लगा है…वैसे वैसे उस पद पर बैठने को आतुर लोग, उच्च अधिकारियों तक पहुंच दौड़ लगाना शुरू कर दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस दौड़ में ऐसे डॉक्टर भी शामिल है जिनका तो डॉक्टरों की वरीयता लिस्ट तक में नाम ही नहीं है…लेकिन सिर्फ हरे हरे काग़ज और अपनी पहुंच दिखाकर इस कुर्सी को पाने की जद्दो जहेद में जुटे हुए है।
आपको बता दे की दुर्ग सीएचएमओ डॉक्टर जय प्रकाश मेश्राम का दो वर्षीय कार्यकाल काफी विवादो से भरा गुजरा है जिसमे कीर्ति पैथोलॉजी लैब, डीएमएफ फंड में डॉ को 2-3 लाख वेतन देने का मामला, विशाखा कमेटी की रिपोर्ट का मामला सहित अभी हाल ही में एक निजी नर्सिंग होम संचालक डॉक्टर विश्वनाथ यादव द्वारा बकायदा सार्वजनिक रूप से प्रेस कांफ्रेंस कर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संरक्षण से नर्सिंग होम एक्ट नोडल अधिकारी डॉक्टर अनिल शुक्ला पर खुलेआम पैसों के लेन देन का गंभीर आरोप लगाया गया था। जिस पर आज तक इस मामले में दुर्ग सीएचएमओ अधिकारी डॉक्टर जे पी मेश्राम द्वारा कोई संज्ञान न लेना ये काफ़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।
शायद यहां से शुरू हुई थी कहानी…
आपको बता दें कि विगत वर्ष कीर्ति पैथोलॉजी जो कि डॉ मेश्राम द्वारा संचालित है उसका पर्यावरण लाइसेंस नहीं होने के चलते नर्सिंग होम लाइसेंस कैंसिल कर 1.36 लाख का जुर्माना लगाया गया था.इस प्रकरण में दुर्ग सीएमएचओ ने खीझकर तत्कालीन अधिकारी डॉ खण्डेलवाल से नर्सिंग होम शाखा का प्रभार वापस लेकर डॉ अनिल शुक्ला को नर्सिंग होम एक्ट का नोडल अधिकारी बना दिया था।
जिसके बाद डॉक्टर अनिल शुक्ला ने प्रभार लेते ही निजी अस्पतालों के साथ नोटिस वाला खेल शुरु किया और जिससे हताश निजी अस्पतालों ने अपनी आवाज भी उठाई और अवैध उगाही किया जाने का आरोप लगाते हुए एक निजी अस्पताल के संचालक डॉक्टर विश्वनाथ यादव ने इनके विरोध में प्रेस कांफ्रेंस कर इन पर पैसे मांगने तक का आरोप लगा डाला।
अब ऐसे में सवाल खड़े होता है कि छोटी छोटी बातों पर निजी अस्पतालों के विरुद्ध जाँच करवाने वाले सीएमएचओ ने डॉ अनिल शुक्ला के ऊपर लगे पैसे माँगने जैसे गंभीर आरोपों की जाँच क्यूँ नहीं करवाई ??
यौन उत्पीड़न मामले में विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में डॉ.एस के जामगड़े पर हुआ था दोष सिद्ध…
सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ महिला कर्मी से कार्य स्थल में यौन उत्पीड़न के आरोप में डॉ.एस के जामगड़े पर दोष सिद्ध पाया गया था जिसमे विशाखा समिति की रिपोर्ट में उन्हें दोषी बताया गया था। इस मामले में दो गवाहों के अलावा 11 अन्य कर्मियों के बयान लिए गए थे।
जिसमे डॉ. जामगड़े को भी अपना पक्ष रखने के लिए मौका दिया गया था जिसमे उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था लेकिन गवाह सहित सभी सहकर्मियों के बयान के आधार पर उन्हें दोषी पाया गया था। जिस पर अब तक कार्रवाई आधी अधूरी पड़ी हुई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने शासन को कार्यवाही रिपोर्ट भेजने में लेट लतीफी किया
क्या दुर्ग कलेक्टर और हेल्थ डॉयरेक्टर को दी गई होगी इन विषयों पर जानकारी…
जिस तरह से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्वास्थ्य विभाग का मामला सामने आया है चाहे महिला कर्मी से यौन उत्पीड़न,नर्सिंग होम एक्ट का नोडल अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप और जिले के सीएमएचओ पद के लिए भागदौड़ अब ऐसे में ये देखना होगा कि क्या दुर्ग कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी इन सभी विषयों पर संज्ञान लेकर गंभीरता से इसकी जांच के आदेश देकर खाली होने जा रही सीएमएचओ की कुर्सी के लिए योग्य डॉक्टर को प्रभार सौपती हैं ????
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