जनअधिकार अभियान समिति ने एफएसएनएल के विनिवेशीकरण को बताया काला अध्याय , लोगों से इसके खिलाफ एकजुटता की अपील

द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग/भिलाई
आचार्य नरेंद देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति ने सार्वजनिक उपक्रम फैरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) के विनिवेश पर रोष जाहिर किया है।
समिति के अध्यक्ष आर पी शर्मा ने कहा है कि साल 2007 से आज 2024 तक उन्होंने स्क्रैप माफिया के खिलाफ आवाज उठाते हुए इस सार्वजनिक उपक्रम को बचाने की हरसंभव कोशिश की।
राजग सरकार ने एफएसएनएल को जापान 320 करोड की उच्चतम बोली में बेच दिया…
लेकिन केंद्रीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने एफएसएनएल को जापान की कोनोइक ट्रांसपोर्ट कंपनी लिमिटेड को 320 करोड की उच्चतम बोली में बेच दिया।
जबकि यह कंपनी भारत सरकार को सालाना लाभांश 300 करोड़ रूपए से ज्यादा का देती थी। आर पी शर्मा ने कहा कि इस्पात मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने के सिलसिला अब थमने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि आज जनमानस की हार हुई है और पूंजीपतियों के भरोसे चलने वाली सरकार की जीत हुई है।
नरेंद्र मोदी सरकार सुनने से इनकार कर दिया…
उन्होंने कहा कि निजीकरण के इस काले अध्याय को शुरू करने से पहले लगातार फायदे में रही कंपनी को निजी हाथों में सौंपने से पहले किसी भी आवेदन या आवाज को नरेंद्र मोदी सरकार सुनने से इनकार कर दिया।
इससे साफ है कि यह जनविरोधी और पूंजीवादी व्यवस्था पर चलने वाली सरकार है। इस सरकार का मकसद मजदूर, किसान और बेरोजगार नौजवानों का शोषण करना और उनकी आवाज को दबाना रह गया है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तक को कई पत्र लिखकर आगाह किया…
आर पी शर्मा ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तक को कई पत्र लिखकर आगाह किया कि एफएसएनएल को निजी हाथों में नहीं जाने दे।
उन्होंने कहा कि इसी एफएसएनएल और बीएसपी के बीच कतिपय अफसरों की मिली भगत से हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ जब उन्होंने आवाज उठाई थी तो उनके खिलाफ उच्च पदस्थ अफसरों ने दुर्ग जिला न्यायालय में एक करोड़ रूपए की मानहानि का मुकद्दमा कर दिया था।
इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी के जाते ही निजीकरण की मनहूस खबर सुनने को मिल रही है…
इतना ही नहीं लोकनायक जय प्रकाश नारायण प्रतिष्ठान की लीज भी भिलाई स्टील प्लांट ने निरस्त कर उसे अवैध घोषित कर दिया था।
आर पी शर्मा ने जारी बयान में कहा कि अभी दो दिन पहले ही इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी भिलाई आए थे और उन्होंने ऑन रिकार्ड कहा था कि किसी भी सरकारी उपक्रम का निजीकरण नहीं होगा और उनके जाते ही निजीकरण की मनहूस खबर सुनने को मिल रही है। अब लोगों को भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण की आशंका डरा रही है।
आउटसोर्सिंग व ठेका मजदूरों के भरोसे उत्पादन लिया जा रहा…
जिस भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना जनकल्याण के लिए हुई थी, आज वहां नियमित पद लगातार खत्म किए जा रहे हैं और आउटसोर्सिंग व ठेका मजदूरों के भरोसे उत्पादन लिया जा रहा है।
जाहिर है सरकार की मंशा इसके विनिवेश की है। इस वजह से यहां के कतिपय अफसर और कुछ कर्मी भी चुप्पी साध लिए हैं। जिससे कि 70 लाख टन सालाना हॉट मेटल क्षमता वाला यह विशालकाय स्टील प्लांट भी निजीकरण के लिए तैयार हो जाए।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत ऐसे निजीकरण के खिलाफ तमाम मतभेद भुलाकर एकजुट होने की है। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर यह सरकार देश के करोड़ों दलित और पिछड़ा वर्ग समुदाय का आरक्षण खत्म कर देगी।
