
THE CITY REPORT NEWS@DURG/BHILAI
नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) द्वारा आयोजित वार्षिक उत्सव “भाव–राग–मंजरी” के अंतर्गत दोपहर सत्र में शास्त्रीय संगीत, लोक-परंपरा और नवाचार का गरिमामयी संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध न्यूरो सर्जन एवं संवेदनशील संगीत साधक डॉ. अजय नागराज (रायपुर) की मोहन वीणा पर प्रस्तुत भावपूर्ण एवं शास्त्रीय गरिमा से परिपूर्ण प्रस्तुति रही, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
डॉ. नागराज ने समय-सिद्धांत का पालन करते हुए दोपहर के राग वृंदावनी सारंग में विलंबित त्रिताल की विस्तारपूर्ण गत से प्रस्तुति का आरंभ किया।
इसके पश्चात रूपक ताल में विलंबित गत तथा मध्यलय गायकी अंग की सजीव बंदिश प्रस्तुत की…

वादन से पूर्व स्वयं बंदिश का गायन कर उन्होंने श्रोताओं को रचना की भावात्मक संरचना से परिचित कराया। त्रिताल में “झूला डारो अंबुआ की डारी” बंदिश के माध्यम से गायन एवं वादन के उत्कृष्ट समन्वय का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया।
ऊर्जावान झाला के साथ मुख्य प्रस्तुति का समापन हुआ, वहीं श्रोताओं की फरमाइश पर एक मधुर धुन भी प्रस्तुत की गई।
इस प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तबला वादक पंडित कमल मुखर्जी की संगत विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उनकी सूक्ष्म लयकारी, सधे हुए कायदे-रेले तथा संतुलित वादन ने मोहन वीणा की रागात्मक अभिव्यक्ति को और अधिक समृद्ध किया।
झाला से पूर्व मोहन वीणा एवं तबला के मध्य प्रश्न–उत्तर की जुगलबंदी ने कार्यक्रम में विशेष रोचकता उत्पन्न की…

इसके बाद ग्लास हार्प जैसे दुर्लभ वाद्य पर श्री खिलेंद्र दास की प्रस्तुति ने श्रोताओं को एक अनोखा एवं संवेदनशील संगीत अनुभव प्रदान किया, वे इस विधा में छत्तीसगढ़ के एकमात्र साधक हैं, संपूर्ण भारत में ऐसे तीन ही कलाकार इस कला को जीवंत बनाए हुए हैं।
कार्यक्रम में रायपुर से पधारे प्रसिद्ध सितार वादक पंडित अनिन राय तथा वरिष्ठ संगीत शिक्षाविद् डॉ. दीपक बेडेकर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ऋचा ठाकुर, ने वार्षिक प्रतिवेदन में महाविद्यालय की उपलब्धियों को बताया…

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अजय सिंह, प्राचार्य, वीवायटी ऑटोनॉमस पीजी. कॉलेज दुर्ग ने कहा वे संगीत महाविद्यालय के छात्र छात्राओं की प्रगति को देखकर अत्यधिक प्रसन्न हैं भविष्य में यह उल्लेखनीय स्थान बनाएगा ।
उन्होंने बीपीए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के मेधावी विद्यार्थियों को उनके-अपने वर्ग में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने पर प्रमाण-पत्र एवं पदक प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
वार्षिक उत्सव के अंतर्गत महाविद्यालय के सभी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा भरतनाट्यम में पुष्पांजलि, लोकनृत्य में मटकी नृत्य, देवार करमा और पंथी नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति दी गई सुगम गायन में गीत और गजल की प्रस्तुति को सराहा गया।

एकालाप, मिमिक्री एव गिटारं वाद्य-संगीत ने समां बांध लिया वहीं हिंदुस्तानी गायन विभाग से राग बिहागए छोटा ख्याल और तराना की सामूहिक प्रस्तुति ने मंत्र मुग्ध कर दिया ।
इन विविध भाव राग मंजरी की सांस्कृतिक गतिविधियों में शास्त्रीय अनुशासन के साथ छत्तीसगढ़ी लोक-संवेदना की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिली। कार्यक्रम का सशक्त संचालन मुख्य एंकर वत्सल तिवारी तथा आभार प्रदर्शन एवं आरंभिक संचालन डॉ. निधि वर्मा द्वारा किया गया।
आयोजन में शिक्षकगण राजेन्द्र कुमार, सरला साहू, भारती जंघेल के साथ कार्यालयीन स्टाफ यशवंत साहू, धनराज भोयर एवं गौरव मनहरे का सराहनीय सहयोग रहा। वरिष्ठ विद्यार्थी जगदीश बामनिया, तपन कुमार, सुषमा आर्या,रामचंद्र घोष, गुरमीत सिंह ने व्यवस्थापन किया ।
समग्र रूप से “भाव–राग–मंजरी” शास्त्रीय संगीत, लोक-परंपरा और समकालीन अभिव्यक्ति का सशक्त मंच सिद्ध हुआ, जिसने विद्यार्थियों, कलाकारों और श्रोताओं के लिए एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभूति प्रदान की।
===
