वृद्धाश्रमों और मानसिक रूप से विशेष जरूरत वाले लोगों के आश्रय स्थल में वितरित किए फिनायल, डिटर्जेंट, लिक्विड सोप, फल सहित अन्य उपयोगी सामग्री…

TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg

बारिश का मौसम अपने साथ जहां हरियाली और राहत लेकर आता है, वहीं संक्रमण और बीमारियों की आशंकाएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सामाजिक संस्था “दिशा” ने संवेदनशीलता और सेवा भावना का परिचय देते हुए पुलगांव,दुर्ग तथा भिलाई क्षेत्र के सेक्टर-8 एवं सेक्टर-2 के वृद्धाश्रमों साथ ही सेक्टर-3, भिलाई स्थित मानसिक रूप से विशेष जरूरत वाले लोगों के आश्रय स्थल “फील परमार्थम फाउंडेशन” में स्वच्छता सामग्री एवं फल का वितरण किया।
संस्था द्वारा फिनायल, डिटर्जेंट, लिक्विड सोप, फल एवं अन्य आवश्यक सामग्री की किट उपलब्ध कराई गई, जिससे मानसून के दौरान वहां रहने वाले बुजुर्गों एवं आश्रितों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। संस्था के सदस्यों ने सामग्री वितरण के साथ-साथ आश्रमवासियों से आत्मीय मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना।

सेवा कार्य के दौरान बुजुर्गों के चेहरों पर झलकती मुस्कान और आत्मीयता ने माहौल को भावुक बना दिया। कई बुजुर्गों ने संस्था के सदस्यों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि समाज का यह अपनापन उनके जीवन में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार करता है।
संस्था के सदस्यों ने बताया कि सेवा केवल वस्तुओं के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों के साथ खड़े होने का संकल्प है जिन्हें स्नेह, सहयोग और संवेदना की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। मानसून के दौरान स्वच्छता बनाए रखने में यह सामग्री महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म : संस्था “दिशा”

संस्था “दिशा” लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान दे रही है। संस्था का मानना है कि जरूरतमंदों के जीवन में छोटी-सी सहायता भी बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
इस अवसर पर संस्था “दिशा” के श्री राजेश धारकर, प्रदीप दास, मोहन गिरी, शांतनु दासगुप्ता,दुष्यंत तिवारी, कल्याण राय, बापी दास, सुजीत चक्रवर्ती, भास्कर देवनाथ एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने समाज के सक्षम वर्ग से जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया।
आशीर्वाद के साथ मिला आत्मिक संतोष
कार्यक्रम के अंत में आश्रम प्रबंधन एवं आश्रमवासियों ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा के इस छोटे से प्रयास ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मानवता की सच्ची पहचान दूसरों के जीवन में सुख, सुरक्षा और सम्मान का भाव जगाने में ही निहित है।
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