छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण-पत्र के सरलीकरण एवं समस्या के स्थायी समाधान को लेकर एसटी एससी समाज के लोग सैकड़ों की संख्या में कलेक्टोरेट पहुंच प्रदर्शन किया…

TheCityReportNews@Durg. छत्तीसगढ़ में नागरिकों को जाति प्रमाण-पत्र बनवाने में हो रही समस्या को देखते हुए सरलीकरण की मांग को लेकर लगातार कई बार आंदोलन और धरना प्रदर्शन कर चुके लोगो ने बुधवार को सैकड़ो की संख्या में एसटी एससी समाज के बैनर तले पैडल रैली निकाल जिला कलेक्टोरेट का घेराव किया इस दौरान भाजपा पार्षद अजीत वैध ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार जाति प्रमाण पत्र बनाने को लेकर आम जनता को गुमराह कर उनके भरोसे के साथ खेल रही है,,, इस दौरान वहा सैकड़ो की संख्या में मौजूद एसटी एससी समाज के लोग दुर्ग के पटेल चौक पर अपना आक्रोश दिखाते सड़क पर बैठ प्रदर्शन भी किया।
गौर तलब है की लंबे समय से जाति प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर दर दर भटक रही शहर की आम जनता छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण-पत्र के सरलीकरण एवं समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से ज्ञापन में अंकित बिन्दुओं पर कार्यवाही किए जाने को लेकर एस डीएम को ज्ञापन भी सोपा है…
छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण-पत्र के सरलीकरण एवं समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से इस ज्ञापन में अंकित बिन्दुओ पर कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किए जाने बाबत

छत्तीसगढ़ में नागरिकों को जाति प्रमाण-पत्र बनवाने में हो रही समस्या को देखते हुए सरलीकरण के उद्देश्य से शासनादेश दिनांक 06.08.2019 जारी कर शासन द्वारा पांच सदस्यीय अध्ययन दल गठित किया गया था, जिसके परिपालन में अध्ययन दल द्वारा झारखण्ड, ओडिसा एवं तेलंगाना का भ्रमण / दौरा करने के बाद जाति प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में अपनाये जाने योग्य बिन्दुओं पर अनुशंसा सहित प्रतिवेदन, लगभग तीन वर्ष पूर्व प्रस्तुत किया गया था। समस्या के समाधान हेतु विभिन्न संगठनों द्वारा भी प्रस्तुत ज्ञापनों में उक्त तीन राज्यों के अतिरिक्त उत्तराखण्ड एवं राजस्थान के पत्र / परिपत्रों के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, हरयाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु के सरल आवेदन पत्रों (1 से 2 पृष्ठों के) की छायाप्रतियां संलग्न कर निवेदन किया गया था।

2. कृपया छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण-पत्र की समस्या के स्थायी समाधान एवं प्रक्रिया के सरलीकरण हेतु निम्नांकित बिन्दुओं पर पुनः अनुरोध है :- बिन्दु वर्ष 1950 (Cut Of Date) के स्थान पर वर्ष 2000 (राज्य पुनर्गठन तिथि)छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समय-समय पर जारी कुछ पत्र / परिपत्रों में वर्ष 1950 या उसके पूर्व का पूर्वजों की जाति / निवास की पुष्टि से संबंधित दस्तावेजों की मांग नहीं किए जाने के बाद भी तथा मुख्यमन्त्री गितान योजना के अन्तर्गत टोल फ्री नम्बर 14545 पर क ल करने पर वर्ष 1950 के दस्तावेजों की मांग की जाती है।

तत्संबंध में यह अवगत योग्य है कि भारत का राजपत्र, अगस्त 1950 में अंकित निर्देश विन्दु-4 इस आदेश की अनुसूची में किसी जिले कोई संदर्भ या किसी राज्य के अन्य क्षेत्रीय विभाजन को उस जिले या अन्य क्षेत्रीय विभाजन के संदर्भ के रूप में माना जाएगा, जैसा कि 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में था राज्य पुनर्गठन अधिनियम, अगस्त- 1956 के लागू होने के कारण भारत का राजपत्र (परिवर्तित) अक्टूबर, 1956 जारी करते हुए उक्त निर्देश विन्दु-4 में अंकित तिथि को 01 नवम्बर, 1956 परिवर्तित किया गया तत्पश्चात् भारत का राजपत्र. (संशोधित) सितम्बर 1976 में उक्त निर्देश बिन्दु-4 में पुनः संशोधन करते हुए । मई, 1976 किया गया है। मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 दिनांक 25 अगस्त 2000 के भाग-1, भाग-2 एवं भाग-3 के अनुसार तथा विधि, न्याय और कम्पनी कार्य मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं बिहार के पुनर्गठन-संबंधी जारी केन्द्रीय अधिसूचना दिनांक 21.12.2000 में नियत तिथि कमश 01 नवम्बर, 09 नवम्बर एवं 15 नवम्बर, 2000 अंकित है।

अतः उक्त राजपत्रों में अंकित निर्देश बिन्दु-4 में परिवर्तित / संशोधित तिथि, मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 में उल्लेखित धारा एवं भारत सरकार की केन्द्रीय अधिसूचना दिनांक 21.12.2000 के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य हेतु 01 नवम्बर, 2000 ही नियत तिथि (Cut Of Date) है। इसीलिए माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ (बिलासपुर) द्वारा पारित निर्णय दिनांक 04.04.2011 में वर्ष 1950 के भू-अभिलेखों पर जोर दिए बिना विधिसम्मत उ आदेश पारित करने आदेशित किया गया है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा माधुरी पाटिल, एक्शन कमेटी, संजय कुमार सिंह, दूध नाथ प्रसाद, ज्योतिबाला आदि प्रकरणों पर पारित निर्णयों का माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड (नैनीताल) ने अध्ययन उपरान्त उल्लेख कर अजय कुमार एवं अन्य बनाम उत्तराखण्ड शासन में आदेश दिनांक 17.08.2012 पारित करते हुए राज्य पुनर्गठन तिथि 09 नवम्बर, 2000 को Cut Of Date माना है, जिसके अनुपालन में उत्तराखण्ड शासन ने परिपत्र दिनांक 02.04.2013 जारी कर विस्तृत निर्देश जारी किए है।

माननीय उच्च न्यायालय, मध्य प्रदेश व जबलपुरऋ द्वारा पारित निर्णय दिनांक 14.05.2018 में कहा गया है कि राज्य में जन्मे, पले-बढ़े एवं शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को प्रवासी या विस्थापित नहीं माना जा सकता है, उसे राज्य में जन्म लेने एवं यहीं से शिक्षा प्राप्त करने के कारण स्थायी जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का अधिकार है।

माननीय उच्चतम न्यायालय ने पंकज कुमार के प्रकरण में झारखण्ड उच्च न्यायालय के निर्णय को रद्द करते हुए आदेश दिनांक 19.08.2021 में कहा है कि राष्ट्रपति आदेश की अधिसूचना वर्ष 1950 (अनुसूचित जाति आदेश दिनांक 10.08.1950 एवं अनुसूचित जनजाति आदेश दिनांक 06.09.1950) यथा समय परिवर्तित / संशोधित के अनुसार पूर्ववर्ती राज्य हेतु अधिमान्य जातियां यदि नवीन उत्तरवर्ती राज्य में भी अधिमान्य है, तो नागरिक संलग्न) की तरह जाति प्रमाण-पत्र के सरल आवेदन प्रपत्र छत्तीसगढ़ द्वारा भी अपनाने के साथ ही जात प्रमाण-पत्र जारी करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया सरलीकृत किये जाने की कार्यवाही कर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किये गये जाति प्रमाण-पत्र को सत्यापित करवाने की अनावश्यक प्रक्रिया को समाप्त करते हुए जारी किये गये जाति प्रमाण-पत्रों में से यदि किसी के संबंध में शिकायत प्राप्त हो अथवा संदेहास्पद हो, केवल उसी प्रमाण-पत्र की जांच राज्य / उच्च स्तरीय छानवीन समिति से करवाये जाने का अनुरोध है ।

बिन्दु-3- अस्थायी के स्थान पर स्थायी जाति प्रमाण-पत्र एवं आजीवन वैधता मध्य प्रदेश के पत्र / परिपत्र दिनांक 01.08.1996, 04.04.2002 एवं 16.12.2002 का सम्मिश्रण एवं अनुकरण कर छत्तीसगढ़ ने दिनांक 21.07.2003 को परिपत्र जारी किया, किन्तु मध्य प्रदेश के पत्र दिनांक 30.06.2001 को सम्मिलित कर अनुकरण नहीं किया गया, जिसमें अस्थायी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रथा तत्काल प्रभाव से बन्द की गई है।
छत्तीसगढ़ के अध्ययन दल ने भी अस्थायी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को समाप्त किए जाने की छत्तीसगढ़ में अपनाये जाने योग्य अनुशंसा बिन्दुओं में की है। राजस्थान के परिपत्र दिनांक 09.09.2015 में जारी किये गये जाति प्रमाण-पत्र की अवधि जीवन पर्यन्त वैध रहेगी. ऐसे निर्देश है। राजस्थान की भांति हरयाणा सहित अनेक राज्यों में भी ऐसा ही नियम प्रचलित है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा मो. सादिक विरुद्ध दरबारा सिंग गुरु के प्रकरण में पारित निर्णय दिनांक 29.04.2016 के अनुसार जाति का संबंध जन्म से है, वह परिवर्तित नहीं होती है, अतः स्थायी जाति प्रमाण-पत्र, जो जीवन पर्यन्त वैध हो, ऐसी कार्यवाही किये जाने का अनुरोध है।
बिन्दु-4- छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पूर्व जारी किये गये जाति प्रमाण पत्र को वैध किया जाये और बिना किसी पूर्व जांच के किसी भी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त ना किया जाये ।कृपया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 46 (भाग-4 राज्य की नीति के निदेशक तत्व ष्राज्य के दुर्बल वर्ग विशेषकर अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की विशेष सावधानी से अभिवृ)ि करेगा तथा सामाजिक अन्याय एवं सभी प्रकार के शोषण से उनकी रक्षा करेगार के आलोक में एवं उल्लेखित बिन्दुओं के अनुक्रम में अनुरोध है कि सरलीकरण एवं समस्या के स्थायी समाधान के दृष्टिकोण से छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण-पत्र जारी किये जाने से संबंधित प्रचलित नियमों में संशोधन करते हुए नवीन आदेश जारी करने के साथ ही उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, हरयाणा तेलंगाना की भांति आवेदन प्रपत्र को भी सरल किए जाने हेतु निर्देशित करने का कष्ट करें।
