दुर्ग में कलर चिल्ड्रन अस्पताल की लापरवाई से बच्ची की मौत का मामला सामने आया है.परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल के सामने न्याय की मांग करते हंगामा खड़ा किया…
*अस्पताल प्रबंधन ने दो बाउंसर तैनात कर रखे
*दुर्ग के कलर चिल्ड्रन अस्पताल का मामला
*परिजनों ने पदनाभपुर थाना में की शिकायत
*पीडि़त परिवार से लगभग 70 हजार रुपए तक ऐठ लिया गया
*डॉक्टरों ने बच्ची को निमोनिया होना बताकर इलाज शुरू किया था

द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग. दुर्ग आदर्श नगर स्थित कलर चिल्ड्रन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती बजरंग नगर निवासी प्रेम निर्मलकर की दो वर्षीय पुत्री परिधि निर्मलकर की शनिवार को मौत हो गई। जिसके बाद आसपास फैली खबर से अस्पताल प्रबंधन ने अपने अस्पताल में दो बाउंसर तैनात कर दिया।
गौरतलब है की मृतक बच्ची के पिता और परिजनों का कहना है कि पहले जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था जहां से कलर चिल्ड्रन अस्पताल से किसी ने फोन पर बेहतर इलाज दिलाए जाने की बात कर डाक्टरों ने कलर चिल्ड्रन अस्पताल लाया गया , वही एक दो दिन मरीज (बच्ची) ठीक है कहके पीडि़त परिवार से लगभग 70 हजार रुपए तक ऐठ लिया गया फिर अगले दिन से डॉक्टरों ने बच्ची को निमोनिया होना बताकर इलाज शुरू कर दिया और जिसके चलते बच्चीं की शनिवार को मौत हो गई।
पीडि़त परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ की शिकायत
दुर्ग आदर्श नगर स्थित कलर चिल्ड्रन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती दो वर्षीय परिधि निर्मलकर की बजरंग नगर निवासी प्रेम निर्मलकर की दो वर्षीय पुत्री की शनिवार को मौत हो गई थी। जिसके बाद बच्ची के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था वही अब पीडि़त परिवार ने अस्पताल की इस लापरवाही की शिकायत दुर्ग के पदनाभपुर थाना पहुंच की,,जिसके बाद अब अस्पताल प्रबंधन हरकत में आकर मामले को दबाने की जुगत में लगा हुआ।

गौरतलब है की दुर्ग कलर चिल्ड्रन अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत पर बच्ची के पिता प्रेम निर्मालकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब बच्ची जिला अस्पताल में भर्ती थी तो इस कलर चिल्ड्रन अस्पताल से मुझे फोन आया कि हमारे यहां बच्ची को ले आओ बेहतर इलाज हो सकेगा,,जिसके बाद दो तीन ठीक रहने का आश्वाशन देने के बाद शनिवार को खतरा बताते बच्ची की मौत की खबर सुनाई,, वही मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने बच्ची को निमोनिया होना बताकर इलाज शुरू किया था,,इसी मामले में कलर चिल्ड्रन अस्पताल की गैर जिम्मेदाराना रवैए से आक्रोशित परिजनों ने शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
जिस तरह कोई भी डॉक्टर का पेशा किसी की जान लेना नही होता बल्कि निस्वार्थ भाव से उसकी सेवा कर उसको ठीक करना होता है मगर कलर क्लीनिक के सामने बाउंसर खड़ा देख और अस्पताल प्रबंधन का किसी से न मिलना,कही न कही मामले में कुछ लीपा पोती नजर आता है।
