आयोजित इस कार्यशाला में वैज्ञानिको ने जल को संरक्षित करने और भू जल श्रोतों की कमी पर चिंता करने इन विषयों पर प्रकाश डाला…

द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग.
भारत विकसित अभियान 2047 के तहत आयोजित दो दिवसीय समारोह में श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर समारोह में मुख्य अतिथि युवा वैज्ञानिक डॉ रजनीकांत शर्मा उपस्थित हुए इस अवसर पर उन्होंने जल संसाधन की उपयोगिता को लेकर अपना व्याख्यान दिया।जल को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए भू जल श्रोतों की कमी पर चिंता व्यक्त की। वही विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ ए के झा ने विज्ञान दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कुलसचिव पी के मिश्रा ने आर्थिक आजादी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विकसित भारत की परिकल्पना की चर्चा की। इस दौरान विश्व विद्यालय के डायरेक्टर विकास सुशील चंद्र तिवारी ने भी वैज्ञानिक जागरूकता अभियान को गति प्रदान करने आव्हान किया।
वही इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विकसित भारत की परिकल्पना को मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया,जिसमे चंद्रयान का चलित मॉडल आकर्षण का केंद्र था जिसमे अनुपयोगी उपग्रहों के निस्तापन की प्रक्रिया को भी दर्शाया गया था। रसायन और भूगोल, बायोटेक्नोलॉजी के भी मॉडल प्रस्तुत किया गए। साथ ही पोस्टर प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विभिन्न महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया।जिसमे इस वर्ष की थीम विकसित भारत में स्वदेशी तकनीक को लेकर बहुत ही आकर्षक पोस्टर बनाए गए। वही समारोह में कॉलेज की छात्राओ द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई।इस दौरान छात्राओं ने विज्ञान पर आधारित रंगोली परिसर में बनाई जिसे सभी ने सराहा।इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री आई पी मिश्रा ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि विकसित भारत के लिए वैज्ञानिक जागरूकता जरूरी है।इस तरह के आयोजन होते रहना चाहिए। इस अवसर पर आभार प्रदर्शन संदीप श्रीवास्तव ने किया।
अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश विदेश के साइंटिस्ट ने आपने व्याख्यान दिए इस अवसर पर कार्यशाला में वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे वैज्ञानिक…
श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर अन्तर महाविद्यालय स्तर पर पोस्टर,मॉडल तथा ओरल प्रेजेंटेशन प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. प्राची निमजे ने जानकारी देते हुए बताया की बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से विद्यार्थियों ने भाग लिया। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश विदेश के साइंटिस्ट ने आपने व्याख्यान दिए इस अवसर पर कार्यशाला में वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे वैज्ञानिक।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में शहर के सेंट थॉमस महाविद्यालय,रूंगटा इंस्टीट्यूट, बीआईटी,शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के साथ ही रायपुर,राजनांदगांव,दुर्ग, वर्धा के विद्यार्थियों ने अपनी बेहतर प्रस्तुतियों से पुरुस्कृत हुए।संयोजक प्राची निमजे ने बताया की इस वर्ष की थीम विकसित भारत के लिए स्वदेशी तकनीक पर सभी प्रतियोगिताएं आधारित थीं। भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों पर पोस्टर और चलित मॉडल आकर्षण का केंद्र रहें।
विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ ए के झा ने समारोह का समापन करते हुए कहा की परंपरागत देशी ज्ञान का उपयोग भौगोलिक स्थिति के आधार पर वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार करके भारत के विकास के लिए प्रौद्योगिकी का विकास किया जाना आवश्यक है।आत्मनिर्भर विकसित भारत के लिए देशीय प्रोधिगिकी आवश्यक है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को नगद राशि,स्मृति चिन्ह तथा प्रमाण पत्र अतिथियों ने प्रदान किया। विश्व विद्यालय के कुलसचिव श्री पी के मिश्रा,डायरेक्टर विकास सुशील चंद्र तिवारी,विभिन्न संकायों के डीन,विधार्थी उपस्थित थे। अंत में विभिन्न महाविद्यालय से आए प्राध्यापकों,निर्णायकों, विद्यार्थियों,मीडिया प्रतिनिधियों का आभार प्रकट किया गया।
