TheCityReport@durg. दीपावली की रात से गौरा-गौरी की विवाह की परंपरा निभाई जाती हैं। पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना कर गौरा-गौरी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। गौरा गौरी विवाह देखने श्रद्घालुओं की भीड़ रात भर देखने को मिली। वही भजन कीर्तन के साथ ग्रामीण बारात में शामिल हुए ।

वहीं गौरा गौरी विवाह का आयोजन पूरे मोहल्लेवासियों के सहयोग किया गया जिसमें ग्रामवासियों ने बढ़ चलड़कर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार आपस में प्रेम व भाईचारा को बढ़ाता है। गौरतलब है कि दुर्ग शहर ही नहीं ग्रामीण अंचल ग्राम घुमका रीवागहन मे भी गोवर्धन पूजा की गई। पारंपरिक मांदर की धाप पर गौरा-गौरी गीत के साथ विसर्जन यात्रा निकाली

लोक मान्यता है कि गौरा गौरी पूजा के मौके पर सोटे से प्रहार से अनिष्ट टलते हैं और खुशहाली आती है। इसी कामना के लिए हर साल गौरा गौरी का अनुष्ठान कर पूजा अर्चना करते हैं। और दीपो के इस पर्व की सभी को शुभ कामनाएं व बधाई दी जाती है।
