शहीद उमेश साहू की अंतिम यात्रा में शामिल हुए विधायक और और ग्रामीण…
द सिटी रिपोर्ट न्यूज़@दुर्ग
दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोडिय़ा निवासी एवं भारतीय सेना के 19 महार रेजीमेंट के वीर जवान लांस हवलदार उमेश कुमार साहू लेह-लद्दाख के बर्फीली पहाड़ी क्षेत्र पर मां भारती की रक्षा करते हुए 19 अक्टूबर को देर शाम शहीद हो गए।
इनका पार्थिव शरीर 21 अक्टूबर सोमवार को सुबह 8.30 बजे निज ग्राम कोडिया लाया गया एवं सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
शहीद जवान के पार्थिक शरीर को विधायकों ने दिया कांधा…
बर्फीली पहाड़ी क्षेत्र पर मां भारती की रक्षा करते हुए शहीद जवान उमेश कुमार साहू के पार्थिक शरीर को कांधा देने को उमड़ पड़ा जनसैलाब इस दौरान ग्रामीणों के आशु भी छलक पड़े।
इस दौरान पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, शहर विधायक गजेंद्र यादव ,भाजपा दुर्ग जिला अध्यक्ष जितेंद्र वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
करवा चौथ के दिन शहीद की पत्नी पति का चेहरा देखने कर रही थी इंतजार,मिली शहादत की खबर…
आपको बता दें कि दुर्ग जिले के ग्राम कोडिय़ा निवासी आर्मी जवान उमेश साहू पिछले कुछ समय से लेह-लद्दाख में पदस्थ थे। जहां ऑन ड्यूटी उनका निधन हो गया है।
शहीद जवान उमेश के निधन की सूचना करवा चौथ के दिन उनके परिवार को मिली है। करवा चौथ पर जवान पति का चेहरा देखने का इंतजार कर रही पत्नी को उसकी शहादत की खबर मिली जिससे पूरा परिवार शोक में डूब गया है।
गृह ग्राम में शहादत की खबर से मातम पसर गया…
10 साल से आर्मी में अलग-अलग जगह पर पदस्थ रहे, आज शहीद जवान उमेश साहू का पार्थिव देह उनके निवास स्थान ग्राम कोड़ियां में पहुंचा। जहां शहीद जवान को राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित कर अंतिम यात्रा के लिए रवाना हुए,गृह ग्राम में भी शहादत की खबर से पूरे शहर में मातम पसर गया है।
गांव में शोक की लहर दौड़ गई। आर्मी में हवलदार रैंक में पदस्थ जवान पिछले 10 वर्षों से भारतीय सेना का हिस्सा बनकर देश की सुरक्षा में तैनात थे। घर में उनके बुजुर्ग बीमार पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। पूरा गांव बहादुर जवान के लिए शोक व्यक्त करते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
लेह-लद्दाख में अपने देश की सुरक्षा में अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया…
ग्रामीणों ने बताया शहीद उमेश कुमार साहू मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। कुछ वर्षों में ही अपने बड़े भाई, अपनी मां को खोने के बाद बीते जून माह में अपने छोटे भाई को खोया था। भाई का दशगात्र कार्यक्रम निपटाने के बाद ड्यूटी में वापस जाने वाला था लेकिन घर में अधेड़ पिता के ज्यादा तबियत खराब होने से उसको छुट्टी बढ़ानी पड़ी।
पिताजी का इलाज कराकर 30 अगस्त को फिर से ड्यूटी के लिए लौटा था और लेह-लद्दाख में अपने देश की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। अब उनके घर में अस्वस्थ एवं अधेड़ उम्र के पिता, पत्नी और छोटे बच्चे ही हैं जिनकी जिम्मेदारी शहीद उमेश ही निभा रहे थे।
ड्यूटी में वापस लौटने के बाद पत्नी से रोज होती थी बात…
शहीद उमेश साहू की पत्नी ने बताया ड्यूटी में वापस लौटने के बाद रोज बात होती थी। घटना के पहले रात भी बात की थी तब वो पूरा स्वस्थ थे। शनिवार को दोपहर 3.30 बजे आर्मी के अधिकारी घर आकर बताए कि अभी कुछ अस्वस्थ है जिसका इलाज चल रहा है। शाम 7 बजे स्थिति गंभीर बताई और रात 9 बजे शहीद होने की सूचना मिली।
शहीद उमेश साहू के मामा ने बताया कि उन्होंने ही कोटा साथ जाकर 22 सितम्बर 2009 में ड्यूटी जॉइन कराया था। उसकी ट्रेनिंग सागर में फिर जम्मू के अनंतनाग, हिमांचल प्रदेश, ग्वालियर एमपी, मेघालय के बाद फिर से अभी लेह में ड्यूटी कर रहा था।
उनके दो संतान है जिसमें 6 साल की बेटी और 3 साल का बेटा है। 2016 में उरी हमले के दौरान भी उमेश स्पॉट में मौजूद थे लेकिन केंटीन में होने के कारण बचने की सूचना घरवालों को दिया था।
द सिटी रिपोर्ट न्यूज भी शहीद जवान की शहादत पर अपनी श्रंद्धाजलि अर्पित करता है, जय हिंद…
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