
The City Report News@Bhilai/Durg
नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के सन्दर्भ में-“छत्तीसगढ़ की कला परम्परा बीते 25 साल विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध लोककला संरक्षक, संवाहक डॉ डी पी देशमुख ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना को साकार हुए 25 वर्ष हो गए और इन सालों में राज्य विकास की ओर लगातार अग्रसर है उन्होंने छग के विभिन्न लोक गीतों को गाकर उनकी पहचान विद्यार्थियों से करायी।
दक्षिण भारत की कला को यहाँ स्थापित करने में कड़े परिश्रम की जरूरत थी यहाँ के लोगों ने उसे आत्मसात किया है…

छग की प्रमुख लोक कला नाचा की विशेषता बताई। छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कला के क्षेत्र में स्थान बनाने के लिए अत्यधिक मेहनत की आवश्यकता है।
विशिष्ट वक्ता डॉ जी रथीश बाबू ने छग के अपने शास्त्रीय नृत्य के आरंभिक संघर्ष बताया। उन्होंने कहा की दक्षिण भारत की कला को यहाँ स्थापित करने में कड़े परिश्रम की जरूरत थी यहाँ के लोगों ने उसे आत्मसात किया है और वर्तमान में केवल भिलाई में ही सैकड़ों बच्चों ने इसे साधना के लिए चुना है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ ऋचा ठाकुर ने स्वागत उदबोधन में कहा छग राज्य प्राकृतिक सम्पदा कलाओं एवं संस्कृति से परिपूर्ण है बीते 25 वर्षों में लगातार यह राज्य प्रगति के सोपान तय कर रहा है।
नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालयों की स्थापना भी इस क्रम की बड़ी उपलब्धि है। संगोष्ठी के प्रारंभ में सरस्वती वंदना एवं राज गीत की प्रस्तुति विद्यार्थियों द्वारा की गयी ।

अतिथि व्याख्याता डॉ बाबूलाल सिंह, श्री वत्सल तिवारी एवं श्री राजेंद्र कुमार द्वारा वक्ताओं का शौल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया।
मुख्य वक्ता डॉ डी पी देशमुख द्वारा महाविद्यालय को उनके द्वारा छग के पर्यटन और संस्कृति पर लिखी गयी पुस्तकें भेंट की गयी। छात्र छात्राओं द्वारा गज़ल एवं छत्तीसगढ़ी गीतों की शानदार प्रस्तुति दे गयी।
संगोष्ठी का सफल सञ्चालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ निधि वर्मा प्राध्यापक हिंदी ने किया ।
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