संगीत महाविद्यालय में लोक संगीत पर दो दिवसीय ज्ञान दान कार्यशाला का सफल आयोजन…

The City Report News@Bhilai/Durg
छत्तीसगढ की समृद्ध लोक संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने के उद्देश्य से नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग में IQAC प्रकोष्ठ दद्वारा लोक संगीत पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
विशेषज्ञ वेदांत सिंह और सर्वजीत बम्बेश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में छात्र छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की परंपराओं, जैसे पंथी नृत्य-संगीत, राउत लाचा और सुवा लोक गीतों को जाना।
पहले दिन विशेषज्ञ वेदांत सिंह ने लोक संगीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके सामाजिक महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय जान परंपरा की जड़ों में है लोक कला।
आदिवासी और ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखता है…

लोक संगीत न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखता है। वहीं, सर्वजीत बम्बेश्वर ने वाद्ययंत्रों जैसे मंदर, ढोलक और बांसुरी के माध्यम से प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रतिभागियों ने अभ्यास किया, जिसमें छत्तीसगढ़ी लोक गीतों का गायन और सामूहिक प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण रहा। दूसरे दिन कार्यशाला में लोक संगीत को आधुनिक संदर्भ में ढालने पर चर्चा हुई।
वेदांत सिंह ने युवाओं को पारंपरिक संगीत को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ले जाने की सलाह दी, कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने सीखी हुई कलाओं का प्रदर्शन किया।
महाविद्यालय भविष्य में और अधिक कार्यशालाओं का आयोजन करेगा…

प्राचार्य डॉ. ऋचा ठाकुर ने संबोधन में कहा, ‘यह कार्यशाला हमारे महाविद्यालय के छात्रों को लोक संगीत की जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ऐसी पहले निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि महाविद्यालय भविष्य में और अधिक कार्यशालाओं का आयोजन करेगा, जिसमें शास्त्रीय संगीत के साथ लोक तत्वों का समावेश होगा।

हमारी विशिष्ट ज्ञान दान श्रृंखला के माध्यम से विशेषज्ञों की आमंत्रित करते रहेंगे। वरिष्ठ छात्र जगदीश बामनिया ने कहा कि इस तरह की शिक्षाप्रद कार्यशाला निरंतर लगते रहना चाहिए।
आयोजन को सफल बनाने में महाविद्यालय के सदस्यों डॉ बाबूलाल सिंह, डॉ निधि वर्मा, वत्सल तिवारी, राजेंद्र कुमार, धनराज भोयर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यह कार्यक्रम न केवल संगीत शिक्षा को मजबूत करने वाला साबित हुआ, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी सहायक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का संचालन कार्यालय प्रमुख श्री यशवंत साहू एवं IQAC समन्वयक डॉ निधि वर्मा ने किया।
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