
The City Report News@Bhilai/Durg
कार्तिक शुक्ल षष्ठी के पावन अवसर पर छठ महापर्व का तीसरा दिन पूरे देशभर में श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग गया। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगरी भिलाई में भी यह लोक आस्था का प्रतीक बने छठ पर्व ने लोगों को एकजुट कर दिया।
विशेष रूप से भिलाई-3 के प्रसिद्ध बंधवा तालाब घाट पर संध्या अर्घ्य का अनुष्ठान देखने लायक रहा, जहां सैकड़ों व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को जल अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
इस अवसर पर पालक संघ की जिला अध्यक्ष संध्या उपाध्याय भी घाट पहुंचीं और छठी मईया की पूजा-अर्चना की ।
छठ पूजा 2025 की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से हुई थी, जब व्रती महिलाओं ने पवित्र जल स्रोतों में स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण किया…

26 अक्टूबर को खरना पर्व पर निर्जला उपवास रखा गया और सूर्यास्त के समय गुड़ की खीर-रोटी का प्रसाद वितरित किया गया। आज, 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य का दिन है, जो छठ महापर्व का सबसे कठिन और भावुक चरण माना जाता है।
व्रतधारियों ने दिनभर जल ग्रहण न करने का संकल्प लिया और शाम को तालाब किनारे एकत्रित होकर ठेकुआ, फलाहार और सुपारी का थाली सजाकर अस्ताचलगामी सूर्य भगवान को अर्घ्य चढ़ाया।
भिलाई-3 के बंधवा तालाब पर यह दृश्य अत्यंत मनोरम था, जहां लालिमा से रंगी जलधारा में खड़ी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति भजनों पर थिरक रही थीं।
छठ पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक एकता और नारी शक्ति का प्रतीक भी है- संध्या उपाध्याय

पालक संघ की जिला अध्यक्ष संध्या उपाध्याय का इस पर्व में शामिल होना स्थानीय समुदाय के लिए प्रेरणादायक रहा। संध्या जी, जो महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए सक्रिय संघर्षरत हैं, स्वयं व्रती बनीं और घाट पर पहुंचकर छठी मईया के चरणों में शीश नवाया।
उन्होंने बताया, “छठ पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक एकता और नारी शक्ति का प्रतीक भी है। बंधवा तालाब जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।
पालक संघ के माध्यम से हम महिलाओं को इस पर्व के माध्यम से सशक्त बनाने का प्रयास कर रहे हैं।” संध्या जी ने व्रतियों को संबोधित करते हुए कहा कि छठी मईया की कृपा से हर मनोकामना पूर्ण होगी और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
उनके इस योगदान से घाट पर उपस्थित महिलाओं में उत्साह दोगुना हो गया।
बंधवा तालाब घाट पर प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं…

बंधवा तालाब घाट पर प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। नगर निगम ने घाट की सफाई, लाइटिंग, सीसीटीवी निगरानी और गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित की।
शहर के सभी प्रमुख तालाबों और घाट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किया, जबकि पुलिस ने यातायात प्रबंधन के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया। स्थानीय विधायक ने भी दौरा कर व्रतियों को शुभकामनाएं दीं।
तालाब के किनारे सजाए गए डांडिया मंच पर छठ लोकगीतों की धुन पर नृत्य हो रहा था, जो बिहारी प्रवासियों की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत कर रहा था। एक वृद्धा व्रती ने बताया, “यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर हम जीवन के चक्र को स्वीकार करते हैं…

छठ महापर्व का समापन कल 28 अक्टूबर को ऊषा अर्घ्य से होगा, जब उगते सूर्य को अर्घ्य चढ़ाया जाएगा। भिलाई में यह पर्व प्रवासी बिहार-झारखंड वासियों के लिए गृह त्योहार की तरह है, जो औद्योगिक जीवन की थकान को भक्ति की मधुरता से दूर करता है।
संध्या उपाध्याय जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी से यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक जागरण का माध्यम भी बन गया। कुल मिलाकर, बंधवा तालाब पर आज का संध्या अर्घ्य अनुष्ठान छठ की महिमा को चरितार्थ करता रहा, जहां हजारों की भीड़ में आस्था की लहरें उफान पर थीं।
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