
TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
इस वर्ष अल-नीनो के चलते मानसून में देरी, खंड वर्षा (लंबे समय तक सूखा) और सीजन के जल्दी समाप्त होने की गंभीर आशंका बनी हुई है। इस संभावित संकट से निपटने और किसानों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक विशेष ‘आकस्मिक कार्ययोजना’ तैयार की गई है।


इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य जोखिम को कम करने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, कम पानी वाली फसलों का चयन, जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना है।
जल संरक्षण और समयबद्ध बुआई सुनिश्चित करने के लिए कतारबद्ध सीधी बुआई यानी डीएसआर पद्धति को अपनाये…

उप संचालक कृषि संदीप भोई ने बताया कि कार्ययोजना अनुसार किसान भाई मौसम की अनिश्चितता से बचने के लिए कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली धान की उन्नत किस्मों को अपनाये। इसके साथ ही, टिकरा और भर्री जैसी ऊंची तथा ढलान वाली भूमियों पर जल संरक्षण और समयबद्ध बुआई सुनिश्चित करने के लिए कतारबद्ध सीधी बुआई यानी डीएसआर पद्धति को अपनाये।
जोखिम को कम करने के लिए किसी एक फसल (जैसे धान) पर पूरी तरह निर्भर न रहें फसल विविधिकारण अपनाएं। धान के बदले कम पानी में होने वाली दलहनी फसल जैसे अरहर, मूंग एवं उड़द तथा तिलहनी फसल जैसे तिल, सोयाबीन, मूंगफली को प्राथमिकता देवें।
फसलों की सुरक्षा के साथ-साथ खेतों की मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए ‘भूमि आच्छादन’ (मलचिंग) तकनीक अपनाये जिसके तहत फसल बोने से पहले और कटाई के बाद खेतों को ऊँचा अथवा दलहनी फसलों से ढका जाएगा ताकि वाष्पीकरण कम हो।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए खेतों में मेड़बंदी (फील्ड बंडिंग) को मजबूत करने और वर्षा जल संवर्धन के स्थानीय पारंपरिक उपायों को पुनर्जीवित करें। आपदा की स्थिति में आर्थिक क्षाति से बचाव हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत कृषक अपना पंजीयन अवश्य करावें।
खेती के दौरान कोई भी समस्या या तकनीकी कठिनाई आती है, तो किसान बिना देरी किए अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के अधिकारियों से तुरंत संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है।
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