डॉ. डी.पी. देशमुख की अध्यक्षता में आयोजन समिति की बैठक संपन्न…

TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
कला-साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ (कवच) एवं गीतवितान कला केंद्र, भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में तथा ऑफिसर्स एसोसिएशन, सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के विशेष सहयोग से 21 जुलाई को प्रगति भवन, ऑफिसर्स एसोसिएशन, सिविक सेंटर, भिलाई में आयोजित होने वाली बहुप्रतीक्षित नाट्य प्रस्तुति “द पोस्टमास्टर” की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।



इसी सिलसिले में मंगलवार को भिलाई निवास कॉफी हाउस में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की संपूर्ण रणनीति पर विस्तार से चर्चा कर अंतिम रूप दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी डॉ. डी.पी. देशमुख ने की। इस अवसर पर कवच की ओर से शक्तिपद चक्रवर्ती, मणिमय मुखर्जी, बबलू बिस्वास एवं शांतनु दासगुप्ता, जबकि गीतवितान कला केंद्र की ओर से चंद्रा बनर्जी एवं मिथुन दास उपस्थित रहे। बैठक में प्रवेश-पास वितरण, अतिथि आमंत्रण, दर्शक व्यवस्था तथा कार्यक्रम संचालन सहित सभी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
द पोस्टमास्टर विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की अमर कहानी पर आधारित एक संवेदनशील हिंदी नाट्य प्रस्तुति है…

बैठक में जानकारी दी गई कि “द पोस्टमास्टर” विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की अमर कहानी पर आधारित एक संवेदनशील हिंदी नाट्य प्रस्तुति है।
इसकी विशेषता यह है कि मंचन में पूर्वी भारत की लोक एवं पारंपरिक पटचित्र कला शैली के दृश्य सौंदर्य का प्रभावी समावेश किया गया है, जिससे प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक अनूठा रंगानुभव बन जाती है। देश के विभिन्न शहरों में इस नाटक के लगभग 50 सफल मंचन हो चुके हैं और इसे दर्शकों की व्यापक सराहना मिली है।
आयोजन समिति ने बताया कि इस सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाने में ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, सेफी के चेयरमैन एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक नरेन्द्र बंछोर का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हो रहा है। साथ ही ऑफिसर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक श्री परविंदर सिंह का भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।
यह प्रस्तुति कोलकाता के प्रतिष्ठित रंगदल ‘थियेटर शाइन’ द्वारा की जाएगी, जो अपनी गंभीर, कलात्मक और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के लिए देशभर में पहचान रखता है। भिलाई के मंचन के बाद दल विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दौरे पर निकलकर इस प्रस्तुति के माध्यम से साहित्य, रंगमंच और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संदेश देशभर तक पहुंचाएगा।
यह कार्यक्रम 21 जुलाई (मंगलवार) सायं 7 बजे प्रारंभ होगा तथा समय पर मंचन शुरू होने के बाद प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे।
बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने इस सांस्कृतिक आयोजन को भिलाई के रंगमंचीय इतिहास का एक यादगार अध्याय बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
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