
TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
▪️ पुलिस लाइन स्थित दधीचि भवन में जिले के विवेचकों एवं MOB आरक्षकों को फिंगरप्रिंट, चांस प्रिंट एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
▪️ प्रशिक्षण में फिंगरप्रिंट ट्रैकिंग, डेवलपिंग, संरक्षण एवं पहचान के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों के न्यायालयीन उपयोग की प्रक्रिया समझाई गई।
▪️ पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-06 भिलाई में E-FSL, E-Prosecution, MLC एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट की ऑनलाइन उपलब्धता तथा E-Challan प्रक्रिया पर समन्वय बैठक आयोजित की गई।
▪️ पुलिस, FSL, अभियोजन एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच डिजिटल समन्वय मजबूत कर नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य बिंदु…दुर्ग जिले में नवीन कानूनों को प्रभावी रूप से लागू करने तथा विवेचना को वैज्ञानिक, तकनीकी एवं डिजिटल रूप से अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक ही दिन दो महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।




पुलिस लाइन स्थित दधीचि भवन में वैज्ञानिक विवेचना एवं फिंगरप्रिंट संबंधी प्रशिक्षण दिया गया, जबकि पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-06 भिलाई में पुलिस, FSL, अभियोजन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ अंतरविभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
संक्षिप्त विवरण
दुर्ग पुलिस द्वारा अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के अधिकतम उपयोग तथा नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल द्वारा लगातार प्रशिक्षण एवं समन्वय की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
इसी क्रम में दिनांक 13.08.2026 को पुलिस लाइन स्थित दधीचि भवन में फिंगरप्रिंट एवं चांस प्रिंट संबंधी एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री अजय साहू, उप पुलिस अधीक्षक एवं फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, रायपुर द्वारा जिले के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फिंगरप्रिंट साइंस, फिंगरप्रिंट ट्रैकिंग, फिंगरप्रिंट डेवलपिंग एवं चांस प्रिंट से संबंधित महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान घटनास्थल से फिंगरप्रिंट एवं चांस प्रिंट की वैज्ञानिक तरीके से खोज, पहचान, संरक्षण एवं विकास की प्रक्रिया के साथ फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट की उपयोगिता एवं प्रभावी प्रयोग के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही घटनास्थल से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा न्यायालय में प्रभावी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
CRPI Act एवं NAFIS संबंधी प्रशिक्षण…
प्रशिक्षण के दौरान Criminal Procedure (Identification) Act, 2022 (CRPI Act) के अंतर्गत फिंगरप्रिंट एवं अन्य पहचान संबंधी अभिलेख/नमूने लिए जाने से संबंधित वैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी गई।
साथ ही राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) एवं उपलब्ध डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया, जिससे संदिग्ध एवं अज्ञात व्यक्तियों की पहचान प्रक्रिया को अधिक त्वरित एवं वैज्ञानिक बनाया जा सके।
अंतरविभागीय समन्वय बैठक…
इसी क्रम में पुलिस कंट्रोल रूम, सेक्टर-06 भिलाई में नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं चिकित्सकों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में E-FSL के संबंध में FSL प्रभारी डॉ. पंकज ताम्रकार, E-Prosecution के संबंध में DPO श्री चौरसिया तथा चिकित्सा संबंधी रिपोर्टों के ऑनलाइन आदान-प्रदान को लेकर जिले के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ आवश्यक प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई।
बैठक में MLC एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ऑनलाइन माध्यम से पुलिस विवेचना के लिए उपलब्ध कराने, रिपोर्टों के समयबद्ध प्रेषण तथा डिजिटल माध्यम से उनके प्रभावी उपयोग के संबंध में जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों एवं चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के साथ समन्वय किया गया।
इसके अतिरिक्त E-Challan प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तथा नवीन कानूनों के अनुरूप डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से संबंधित आवश्यक बिंदुओं पर भी चर्चा की गई।
मॉडस ऑपरेंडी / वैज्ञानिक विवेचना प्रक्रिया…
वैज्ञानिक विवेचना प्रशिक्षण में घटनास्थल से संभावित फिंगरप्रिंट एवं चांस प्रिंट की पहचान, वैज्ञानिक विधि से उनका विकास, संरक्षण, अभिलेखीकरण एवं आवश्यकतानुसार पहचान प्रणाली के माध्यम से मिलान की प्रक्रिया समझाई गई। इससे अज्ञात आरोपियों की पहचान एवं अपराधों के निराकरण में तकनीकी साक्ष्यों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण एवं बैठक का उद्देश्य…
दुर्ग पुलिस द्वारा नवीन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस, FSL, अभियोजन एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर डिजिटल एवं संस्थागत समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
वैज्ञानिक साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, चिकित्सकीय रिपोर्ट एवं अभियोजन संबंधी दस्तावेज समयबद्ध तरीके से उपलब्ध होने से विवेचना की गुणवत्ता एवं गति में सुधार होगा तथा न्यायालय में गुणवत्तापूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।
दुर्ग पुलिस द्वारा नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में लगातार प्रशिक्षण एवं समन्वय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि जिले में वैज्ञानिक विवेचना, तकनीकी दक्षता, डिजिटल प्रक्रिया एवं अंतरविभागीय समन्वय को मजबूत कर कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
सराहनीय कार्य…
उक्त कार्यक्रमों में भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चन्द्रा , अजय साहू उप पुलिस अधीक्षक एवं फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, रायपुर, FSL प्रभारी डॉ. पंकज ताम्रकार, DPO श्री सुनील चौरसिया, संबंधित चिकित्सकगण, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अस्पतालों के प्रतिनिधि, चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक तथा दुर्ग जिले के विभिन्न थाना एवं सीसीटीएनएस प्रभारी एवं MOB आरक्षकों की सहभागिता रही।
दुर्ग पुलिस की अपील…
दुर्ग पुलिस द्वारा नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस, FSL, अभियोजन एवं स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित संस्थानों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
सभी संबंधित विभागों एवं संस्थानों से अपेक्षा है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक रिपोर्ट एवं दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं, जिससे वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विवेचना एवं अभियोजन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
दुर्ग पुलिस का उद्देश्य वैज्ञानिक विवेचना, तकनीकी दक्षता, डिजिटल प्रक्रियाओं एवं अंतरविभागीय समन्वय के माध्यम से नवीन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा दुर्ग जिले को इस दिशा में अग्रणी बनाना है।
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