
द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग. बाबा रामदेव मंदिर गंजपारा दुर्ग में बाबा रामदेव के जन्म उत्सव पर हो रही पंचमुखी हनुमान प्राकट्य की कथा बताते हुए कथावाचक पंडित राजेंद्र शर्मा ने कहा कि रावण के निर्देश पर महामायावी अहिरावण ने भगवान श्री राम व लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक लेकर चले गए तब महाबली हनुमान जी बिना विलम्ब किये उन्हें वापस पृथ्वी लोक लाने के लिए चल दिये । रास्ते में दो पक्षियों के बीच संवाद सुनकर हनुमान जी को श्री राम जी और लक्ष्मण जी के पक्के से पाताल लोक में होने के समाचार की पुष्टि भी हुई । हनुमान जी ने पाताल लोक पहुंच कर सर्वप्रथम शेषनाग को प्रणाम किया व वहां के वास्तुदेव को नमन किया । सर्वप्रथम उनका सामना द्वारपाल मकरध्वज से हुआ जो की हनुमान जी के ही पसीने से पैदा हुए थे अतः उनके पुत्र थे । मकरध्वज उन्हें अंदर प्रवेश करने से बार-बार रोक रहा था उनके बीच खूब संवाद व बाद में युद्ध भी हुआ आखिर में हनुमान जी ने मकरध्वज को बांधकर पाताल लोक के अंदर प्रवेश किया । फिर एक छोटे मक्खी का रूप बनाकर वे बाकी द्वारपालो से बचते हुए अहिरावण के समीप पहुंचे । जहां अहिरावण देवी की पूजा अर्चना कर भगवान श्री राम व लक्ष्मण की बलि की तैयारी कर रहा था । हनुमान जी देवी की प्रतिमा के अंदर प्रवेश किये जिससे प्रतिमा में तेज उत्पन्न हुआ । रावण ने देवी को अनेक प्रकार के भोग लगाए थे जिसमें मांस आदि भी शामिल था तब हनुमान जी ने पंचमुखी हनुमान के रूप में प्रकट होकर उन भोगों का सेवन किया जब जैसा भोग आता तब यथायोग्य मुख से वे भोजन ग्रहण करते । बलि से पहले भगवान श्री राम व लक्ष्मण जी से उनकी अंतिम इच्छा पूछी गई। भगवान श्री राम ने भरत को याद किया परंतु भरत के नाम से पुकार कर उन्हें यहां पर उपस्थित नहीं है कहकर फिर लक्ष्मण जी की इच्छा पूछी गई तब लक्ष्मण जी ने कहा कि मुझे पवनपुत्र हनुमान से मिलने की इच्छा है तब हनुमान जी के नाम की पुकार लगाई गई । वहां पहले से उपस्थित हनुमान जी साक्षात अपने रूप में प्रकट होकर अहिरावण की भुजा उखाड़ फेंके व उनका वध किया साथ ही अन्य राक्षसों का वध किया । भगवान श्री राम व लक्ष्मण जी को लेकर हनुमानजी मकरध्वज के पास पहुंचे वह उन्हें पूरी बात बताई व वहां का उन्हें राजा घोषित किया । जिसके बाद हनुमान जी अपने कंधों पर बैठाकर श्रीराम व लक्ष्मण को लेकर वापस पृथ्वीलोक आए । पंचमुखी हनुमान प्राकट्य की कथा के संपन्न होने पर कथावाचक पंडित राजेंद्र शर्मा रामवाला नागपुर का बाबा रामदेव मंदिर समिति की ओर से सम्मान व अभिनंदन किया गया । बाबा रामदेव जी के जन्म प्रसंग की कथा , माता मैणादे व रुपा दर्जी का परचा , बाबा रामदेव जी के राज्याभिषेक की कथा , सुंदरकांड का पाठ ,पंचमुखी हनुमान प्राकट्य की कथावाचन करने पर पंडित राजेंद्र शर्मा व उनकी सहयोगी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया गया । 24 सितंबर को सुमित लोढ़ा डोंगरगांव के भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित है । इस अवसर पर रमेश राठी, राधेश्याम भूतड़ा , मनोज भूतड़ा , सिद्धार्थ सोनी , संतोष राजपुरोहित , हेमंत टावरी , योगेश शर्मा , गोपाल लढ्ढा , संजय राठी , ताराचंद शर्मा , नंदकिशोर चाण्डक , रामावतार राठी , कमल किशोर बियानी , अशोक राठी आदि सहित सैकड़ो भक्तों उपस्थित थे ।
