महान क्रांतिकारी शहीद ए आज़म भगत सिंह जयंती पर शहीद चौक दुर्ग में भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद चंद्रशेखर आजाद एवं शहीद उधम सिंह की मूर्तियां पुन: स्थापित करने की मांग…

द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग. युवा संगठन एआईडीवाईओ आजादी आंदोलन के महान क्रांतिकारी शहीद ए आज़म भगत सिंह जयंती शहीद चौक दुर्ग में सम्मान से मनाया। इस अवसर पर शहीद चौक दुर्ग में जो चारों क्रांतिकारी शहीद ए आज़म भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद चंद्रशेखर आजाद एवं शहीद उधम सिंह की मूर्तियां पुन: स्थापित करने की मांग को लेकर ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ आर्गेनाइजेशन के द्वारा किया गया शहीद चौक में 12बजे से धरना प्रदर्शन कर जिला प्रशासन से मांग किया कि चारों क्रान्तिकारियों की मूर्तियों को अविलंब पुन: स्थापति करे।
ज्ञात हो कि शहीद चौक दुर्ग में शहीद ए आजम भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, शहीद चंद्रशेखर आजाद और शहीद उधम सिंह की मूर्तियां 25वर्षों से स्थापित थी। जिसे संधारण के नाम पर जिला प्रशासन द्वारा 2020 मे हटा दिया गया है और लगाया नहीं जा रहा है। इन मूर्तियों को लगाने की मांग को लेकर एआईडीवाईओ द्वारा लगातार मांग आंदोलन किया जा रहा है।
आज के इस धरना प्रदर्शन की शुरुआत शहीद ए आज़म भगत सिंह के फोटो पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुआ। सभा को युवा संगठन एआईडीवाईओ के साथियों ने संबोधित किया। एआईडीवाईओ के राज्य सचिव आत्माराम साहू ने कहा कि आजादी आंदोलन की लड़ाई में हमारे देश के सैकड़ो युवाओं ने अपने प्राणों की आहूति दे दी थी। ऐसे ही युवा थे शहीदे आजम भगत सिंह। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ देश की मुक्ति संग्राम में अदम्य साहस के साथ समझौताहीन संघर्ष किया था।
आदर्श के लिए आत्मसम्मान बोध से सराबोर होकर सब कुछ न्योछावर कर भगत सिंह महान जीवन की झलक दिखला गए थे। इसलिए वे शहीद-ए-आजम कहलाए। आज भी वे जनता के, खासकर छात्र-नौजवानों के प्रेरणा स्रोत हैं और बने रहेंगे। भगत सिंह ने न केवल इस देश को अंग्रेजी राज की गुलामी की बेडिय़ों से आजाद कराना चाहा था बल्कि उन्होंने एक ऐसी समाज व्यवस्था कायम करनी चाही थी जिसमें मनुष्य के द्वारा मनुष्य का शोषण न हो। उन्होंने हर तरह के शोषण से मुक्त स्वाधीन देश का सपना संजोया था। भगत सिंह ने कहा था “हमारा संघर्ष उस वक्त तक चलता रहेगा जब तक मु_ी भर लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए साधारण जनता के श्रम का शोषण करते रहेंगे। शोषक चाहे भारतीय हो या अंग्रेज, या दोनों सम्मिलित हो, संघर्ष को कोई शक्ति रोक नहीं सकती।”
आज शोषक पार्टियों द्वारा शहीद ए आजम भगत सिंह सहित आजादी आंदोलन के तमाम क्रांतिकारियों को भुलाने की साजिश की जा रही है। जिसका ज्वलंत उदाहरण शहीद चौक दुर्ग में स्थापित क्रांतिकारियों की मूर्तियों को हटा देना है। आज बेरोजगारी, महंगाई चरम सीमा पर हैं। उच्च डिग्री हासिल करने के बाद भी युवा वर्ग दर दर की ठोकर खा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण किया जा रहा है।
महिलाओं और बच्चियों पर अपराध लगातार बढ़ रहा है। इंसानियत, नीति नैतिकता व संस्कृति का तेजी से पतन हो रहा है। युवाओं को धर्माधता, अवैज्ञानिकता, शराबखोरी, अश्लीलता आदि में डुबाया जा रहा है। ताकि युवा वर्ग सचेत संगठित ना हो सके। ऐसे में आज हम युवाओं का कर्तव्य है कि हम आजादी आंदोलन के क्रांतिकारियों का सपना पूरा करने के लिए आगे आए और शहीद चौक में चारों क्रांतिकारियों की मूर्तियों को लगाने की मांग के साथ -साथ समाज में व्याप्त तमाम शोषण अन्याय के खिलाफ जोरदार युवा आंदोलन संगठित करें।
आज के इस धरना प्रदर्शन का संचालन देवेंद्र पाटिल ने किया।
शहीद ए आज़म भगत सिंह जिंदाबाद, चारों क्रांतिकारियों की मूर्तियों को अविलंब पुन: स्थापित करो, क्रांतिकारियों को इतिहास में उचित स्थान देना होगा, क्रांतिकारियों के जन्म दिवस और शहादत दिवस को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करो आदि मांगों के साथ मांगों को लेकर जोरदार नारे लगाए गए। आज के कार्यक्रम में आत्माराम साहू, देवेंद्र पाटिल, पूजा सागर, अंजू भारती, अभिषेक श्रीवास, तीरित साहू, तमन्ना, मोहनीश राजपूत, दुर्गेश सहित अन्य लोग मौजूद थे। क्रांतिकारी गीत ए भगत सिंह तू जिंदा है के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
