छत्तीसगढ़ में करीब 50 लाख मानसिक रोगी,आत्महत्या के मामले में देश में दुर्ग जिला टॉप पर- डॉ. प्रशांत अग्रवाल
Thecityreportnews@दुर्ग. विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर 10 अक्टूबर को जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग द्वारा मानसिक रोग को लेकर जन जागरुकता फैलाया जाएगा। जिसके अंतर्गत मनोरोग से पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने विभिन्न गतिविधियां करवाई जाएगी। इन गतिविधियों में पोस्टर बनाओं, रंगोली प्रतियोगिता, गायन प्रतियोगिता के अलावा अन्य गतिविधियां शामिल होंगी।
इन गतिविधियों के माध्यम से मरीज व उनक परिजन तनावमुक्त रहेंगे। इसके अलावा डीपीएस स्कूल मरोदा में सुबह 10 बजे विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए चाईल्ड मेंटल हेल्थ एंड अवेयरनेस पर कार्यशाला आयोजित किया गया है। कार्यशाला में जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत अग्रवाल और सोशल वर्कर हर्ष प्रकाश विद्यार्थियों और शिक्षकों को तनाव से दूर रहने के टिप्स देंगे।
9 अक्टूबर को जिला अस्पताल में साईकोलॉजिस्ट रानू नायक,योगा ट्रेनर वेणू गजपाल और मैत्री कॉलेज के नर्सिंग स्टूडेेंट्स द्वारा नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया
जाएगा। जिसके माध्यम से मनरोग के लक्षण और उनसे जुड़ी हुई भ्रांतियों को दूर किया जाएगा। यह बातें जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने शनिवार को मीडिया से चर्चा में कही।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.प्रशांत अग्रवाल ने चर्चा में बताया कि समाज में आज भी मनोरोग चिकित्सकों को पागलों का डाक्टर कहा जाता है। पागल कहलाने के डर से लोग अपनी समस्याओं को लेकर मनोरोग चिकित्सालयों में आने से कतराते हैं।
निमहान्स बैंगलोर द्वारा किए गए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ सर्वे के अनुसार पूरे छत्तीसगढ़ में करीब 50 लाख मानसिक रोगी है। जिसमें 20 लाख मरीज सिर्फ शराब की लत की वजह से मानसिक रोगी है। इनमें से लगभग 10 से 12 लाख रोगियों को ही इलाज संभव हो पा रहा है, जबकि 40 लाख लोगों को इलाज नहीं मिल ही नहीं पा रहा है, यह ट्रीटमेंट गैप कहलाता है। डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल दुर्ग में रोज लगभग 50 से 60 मानसिक रोगी इलाज के लिए आते है।
उनमे शिजोफ्रेनिया, उदासी रोग और नशे से सम्बंधित परेशानियों से ग्रसित मरीजो की संख्या ज्यादा रहती है। छत्तीसगढ़ राज्य में लोगों का भूत-प्रेत, जादू-टोना जैसी अन्धविश्वास पर ज्यादा रुझान होता है। जिसके कारण मरीजो को इलाज के लिए अस्पताल आने में अक्सर देरी हो जाती है और पीडितों का समय पर इलाज नहीं होने से वे परिवार के लिए बोझ बनते चले जाते है। मानसिक रोग से पीड़ित लोगो को इलाज मुहैय्या करवाना और गलत भ्रांतियों को दूर करना राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ कार्यक्रम की प्राथमिकता है, ताकि मरीज बीमारी से उभर कर पुन: समाज व परिवार के लिए उपयोगी बन सके।
डॉ.अग्रवाल ने बताया कि पिछले 1 साल में जिला अस्पताल, दुर्ग में मनोरोगियों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है। खासकर युवाओं में बेरोजगारी, आर्थिक
तंगी, नशे का अत्यधिक सेवन, रिलेशनशिप का टूटना इत्यादि की वजह से तनाव लगातार बढ़ रहा है। सर्वे के अनुसार आत्महत्या के मामले में देश में दुर्ग जिला टॉप पर है। जिले में सालाना 1 लाख व्यक्तियों में 39 व्यक्ति आत्महत्या कर रहे है, जबकि देश में यह आकड़ा 1 लाख व्यक्तियों में 12 व्यक्तियों का है। पूरे देश में आत्महत्या के मामले में छत्तीसगढ़ नंबर तीन पर है।
डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में मरीजों को नि:शुल्क बेहतर उपचार दिया जा रहा है। यहां उन्हें ईलाज के अलावा उनकी कॉउंसिलिंग भी की जाती है। जल्द ही जिला अस्पताल में मनोरोगियों के लिए 30 बेड का मेंटल वार्ड शुरु किया जाएगा। लोगों को लगता है कि मनोरोगियों का ईलाज लंबा चलता है, लेकिन ऐसा नहीं है। नियमित रुप से छ: माह से साल भर दवाई का सेवन कर मनोरोग से छुटकारा पाया जा सकता है।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि आज के समय की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हमारे अपनों के पास ही हमारी बात सुनने का टाइम नहीं हैऔर सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के कारण 90 प्रतिशत जनता आभासी दुनिया में जीने लगी है। जहां फेसबुक, इन्स्टा पर तो उनके हजारो मित्र है, पर
असल जिंदगी में उनकी बात सुनने वाला कोई भी नहीं है।
माता पिता ख़ुद ही बच्चे को चुप करवाने के लिए आज के समय में उनके हाथो में मोबाइल थमा देते है, ताकि उनका बच्चा कोई जिद ना कर पाए, बच्चे ज्यादातर मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण बाहरी दुनिया में ना तो खेलने जाते है और ना ही ज्यादा मित्र बनाते है, जिस से उनकी मानसिक स्थिति कमजोर होते जा रही है।इससे छुटकारा पाने का ईलाज मनोरोग चिकित्सक के पास है।
