इन तकनीकों को अपनाने के लिए बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और निवेश की आवश्यकता है…

द सिटी रिपोर्ट न्यूज़@दुर्ग
भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग में 2 दिसंबर से 14 दिसंबर 2024 तक अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा प्रायोजित ‘अटल’ फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है।
यह फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम “डिजिटल निर्माण प्रौद्योगिकियों का वैश्विक नवाचार और उत्पादन पर इसका प्रभाव” विषय पर आधारित है। इस एफ़ डी पी का उद्देश्य आधुनिक विनिर्माण तकनीकों जैसे थ्री-डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के वैश्विक नवाचार एवं क्रियाशील तकनीकों में विकास को बढ़ावा देना है।

डिजिटल निर्माण प्रौद्योगिकियाँ, जैसे थ्री-डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), वर्तमान समय में उद्योग और उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही हैं। ये तकनीकें न केवल उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक तेज़, सटीक और कुशल बना रही हैं, बल्कि नवाचार के लिए नए आयाम भी प्रस्तुत कर रही हैं।
इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में डिजाइन और प्रोटोटाइप में सुधार, स्वचालन और बुद्धिमत्ता, कनेक्टेड सिस्टम्स, उत्पादन पर प्रभाव, गति और दक्षता, व्यक्तिकृत उत्पादन, पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव क्षेत्र के विशेषज्ञों एवं अध्यापकों ने इन विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इन तकनीकों को अपनाने के लिए बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और निवेश की आवश्यकता है।
साथ ही, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में मैकेनिकल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार संयोजक एवं डॉ. संतोष कुमार मिश्रा सह-संयोजक हैं। इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के आयोजन पर भिलाई इंस्टिट्यूट दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अरुण अरोरा ने बताया कि डिजिटल निर्माण प्रौद्योगिकियाँ वैश्विक उद्योगों में नवाचार को बढ़ावा देने और उत्पादन प्रक्रियाओं को उन्नत करने में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। ये तकनीकें भविष्य में उद्योग और समाज दोनों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।
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