
The City Report News@Durg
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय दुर्ग के द्वारा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर विभिन्न स्थानों पर रक्षा बंधन का कार्यक्रम हुआ इस आयोजन में रीटा दीदी (संचालिक ब्रह्माकुमारीज दुर्ग),रूपाली दीदी के मार्गदर्शन में अनेक ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा राखी बांधी गई।

जिसमें प्रमुख रूप से विज्ञान विकास केंद्र,केंद्रीय जेल दुर्ग, वृद्धाश्रम ,बाल संप्रेषण गृह ,एसटीएफ बघेरा,प्रथम बटालियन,जीआरपी स्टाफ व रेलवे स्टेशन के अधिकारी कर्मचारी एवं कुली भाई,यातायात पुलिस दुर्ग, एनसीसी , एवं पुलिस को बटालियन परेड ग्राउंड में, अण्डा थाना, पुलगांव थाना, मोहन नगर थाना, सिटी कोतवाली दुर्ग, होमगार्ड के अधिकारी और जवान, अनेक शासकीय व अर्द्ध शासकीय संस्थाओं में सभी को परमात्मा रक्षा सूत्र बांधा गया।
रक्षाबंधन का यह पावन पर्व वैसे तो भाई-बहन के स्नेह, सुरक्षा और सम्मान के पर्व के रूप में मनाया जाता है…

रक्षाबंधन का संदेश देते हुए ब्रह्मकुमारी बहनों ने बताया वैसे तो भारत को त्योहारों व पर्वों का देश कहा जाता है जब भी कोई पर्व या त्यौहार आता है तो सभी के मन में खुशी,उमंग,उत्साह व रिश्तो में एक नई मिठास घुल सी जाती है रक्षाबंधन का यह पावन पर्व वैसे तो भाई-बहन के स्नेह, सुरक्षा और सम्मान के पर्व के रूप में मनाया जाता है।

बहनें, भाई को तिलक लगाती है राखी बांधती है व मुख मीठा करती है एवं भाई,बहन को खर्ची देते हैं व उनके रक्षा का संकल्प लेते हैं वास्तव में हर समय किसी की रक्षा संभव नहीं है वास्तव में रक्षा बंधन यह क्या बंधन है।
जिससे हमारी सुरक्षा होती है निराकार परमपिता परमात्मा “शिव” हमें बताते हैं जब हम आत्माएं स्वयं को मर्यादाओं के बंधन में बांधते हैं तो हमारी सुरक्षा स्वतः होती है।
जब हर मनुष्य आत्माओं के कर्म मर्यादा युक्त होते हैं तो यह सृष्टि सतयुग अथवा स्वर्ग कहलाती है…

निराकार परमपिता परमात्मा “शिव” इस कलयुग के अन्त व सतयुग के आदि अर्थात वर्तमान संगमयुग में सभी मनुष्य आत्माओं को यह शिक्षा दे रहे हैं कि सर्व मनुष्य आत्माओं को जो शरीर मिली हुई है।
जिनके कर्म इंद्रियों के द्वारा हम कर्म करते हैं जब हम स्वयं को आत्म निश्चय कर इस देह रूपी इंद्रियों को संचालित करते हैं तो हमारे हर कर्म स्वत: मर्यादा युक्त होते हैं।

जब हर मनुष्य आत्माओं के कर्म मर्यादा युक्त होते हैं तो यह सृष्टि सतयुग अथवा स्वर्ग कहलाती है जिसमें सभी मनुष्य आत्माएं स्वयं को सुरक्षित महसूस करती है
बहनों ने बताया जब मस्तक में तिलक देते हैं तो तिलक का आध्यात्मिक रहस्य यह है कि सदैव यह याद रखना कि हम चैतन्य आत्माएं है न की देह,तिलक के बाद चावल का दाना तिलक के ऊपर लगाया जाता है।
जब हम यह दृढ़ संकल्प करते हैं तो परमात्मा की शक्ति हमें प्राप्त होती है…

जिसे अक्षत कहा जाता है अक्षत अर्थात जिसका कभी क्षय या विनाश ना हो तो आत्मा इस देह में अविनाशी सत्ता है मुख मीठा करने का अर्थ,मुख से सदैव ऐसा बोल बोलें जिससे सामने वाले को हिम्मत,उमंग,उल्लास व खुशी की अनुभूति हो भाई,बहन को खर्ची देते हैं

इसका अर्थ परमात्मा बताते हैं इस रक्षाबंधन में यह संकल्प करना कि जो भी अवगुण या बुराइयां है जो स्वयं को दुःख देते हैं उसे बुराई व अवगुण को परमात्म अर्पण करना अर्थात खर्ची के रूप में देना है जब हम यह दृढ़ संकल्प करते हैं तो परमात्मा की शक्ति हमें प्राप्त होती है ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी चैतन्य प्रभा दीदी,कामिनी दीदी, पूर्णिमा दीदी, मालती दीदी, रेणु दीदी व अनेक ब्रह्माकुमारीज के भाई-बहनों ने अपनी सहभागिता दिया ।
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