
The City Report News@Bhilai-Durg
नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग में दिनांक 26 से 28 नवंबर, 2025 तक तीन दिवसीय स्किल एन्हांसमेंट कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं कलाकारों में शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत की बारीकियों को निखारना तथा व्यावहारिक कौशल में वृद्धि करना था।
कार्यशाला को दो मुख्य विषयों में आयोजित किया गया प्रथम विषय भरतनाट्यम का आहार्य जिसके विशेषज मोहम्मद आसिफ हुसैन (प्रख्यात भरतनाट्यम नर्तक एवं कोरियोग्राफर) थे जिन्होंने आहार्य अभिनय के विभिन्न आयामों, मेकअप, वेशभूषा, आभूषण एवं मंच प्रस्तुति की बारीकियों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं…
द्वितीय विषय हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन के मूल सिद्धांत जिसके विशेषज्ञ श्री माधो राम सिन्हा (वरिष्ठ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक) थे उन्होंने सत्र में तानपुरा, हारमोनियम और तबले के मुख्य तकनीकी तत्वों, उसके संधारण एवं सुधार की बारीकियों को गहराई से बताया ।
प्राचार्य डॉ. ऋचा ठाकुर ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ऐसे विषय कौशल उन्नयन में महत्वपूर्ण भागीदारी रखते हैं।

घुंघरू बाँधते समय दोनों पैरों में बराबर संख्या और बराबर आवाज होनी चाहिए…
कार्यशाला में मोहम्मद आसिफ हुसैन ने कहा की संगीत केवल मनोरंजन के लिए नहीं अपितु आत्मरंजन के लिया भी हैं। उनके द्वारा विशेष बिन्दुओं को बताया गया जैसे घुंघरू बाँधते समय दोनों पैरों में बराबर संख्या और बराबर आवाज होनी चाहिए।
अल्ता सूखने से पहले ही नृत्य शुरू न करें। कॉस्ट्यूम की सिलाई ऐसी हो कि अरमंदी में भी फटे नहीं। सूर्य-चंद्र हमेशा सही दिशा में लगे सूर्य दाहिनी तरफ, चंद्र बाई तरफ। मेकअप हल्का न हो स्टेज पर 50 मीटर दूर तक स्पष्ट दिखना चाहिए।

इलेक्ट्रॉनिक तानपुरे की भी कुछ बेसिक जानकारी प्रदान की…
उन्होंने आहार्य के महत्व एवं पारंपरिक विधियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। श्री माधो राम सिन्हा ने आशीर्वचन देते हुए कहा किआप लोग केवल गायकी ही नहीं बल्कि उसके अन्य सम्बन्धित सिद्धांत को भी जानना जरुरी है।
उन्होंने हारमोनियम के स्केल चेंजर और साधारण (फिक्स्ड स्केल) दोनों तरह के हारमोनियम की पूरा एनाटॉमी के साथ उसके रख रखाव और ट्यूनिंग को बताया। तानपुरे का रख-रखाव, तार बदलने का पूरा तरीका इलेक्ट्रॉनिक तानपुरे की भी कुछ बेसिक जानकारी प्रदान की।
विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सीधे सवाल और शंका समाधान भी किए…
उन्होंने विद्यार्थियों को वाद्य यंत्रों की दीर्घायु और शुद्ध ध्वनि सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सीधे सवाल और शंका समाधान भी किए, जिससे सत्र अत्यंत जीवंत और ज्ञानवर्धक बने।
कार्यशाला का संचालन डॉ निधि वर्मा एवं राजेंद्र कुमार (अतिथि प्राध्यापक, भरतनाट्यम) ने कुशलतापूर्वक किया । तथा आभार प्रदर्शन वत्सल तिवारी ने किया। कार्यशाला के सफल आयोजन सरला साहू, भारती जंघेल एवं वत्सल
तिवारी का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर कार्यालय प्रमुख यशवन्त साहू, धनराज भोयर एवं गौरव मनहरे उपस्थित रहे।
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