न्याय को तेज, सहज और रिश्तों को बचाने वाली प्रक्रिया बनाने पर जोर…

TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
हर विवाद का अंत अदालत के फैसले से ही हो यह जरूरी नहीं। कभी-कभी एक बातचीत, एक सही सवाल और एक निष्पक्ष संवाद वह कर सकता है, जो वर्षों की मुकदमेबाजी भी नहीं कर पाती। इसी सोच के साथ मीडिएशन 3.0 को दुर्ग में और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।



माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर ने जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग के अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर मध्यस्थता को अधिक प्रभावी बनाने और अधिकाधिक उपयुक्त मामलों को संवाद के माध्यम से समाधान तक पहुंचाने पर चर्चा की। उक्त बैठक में जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के अध्यक्ष, सचिव, अन्य पदाधिकारीगण तथा अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
केस से पहले कन्वर्सेशन…
बैठक में इस बात पर विशेष रूप से चर्चा हुई कि हर विवाद में केवल यह देखना जरूरी नहीं कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या दोनों पक्ष ऐसा समाधान तलाश सकते हैं जिसमें किसी की अनावश्यक हार न हो। अध्यक्ष महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा कि वे ऐसे मामलों की पहचान करने में सक्रिय भूमिका निभाएं, जिनमें मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकारों के बीच संवाद स्थापित कर स्थायी एवं स्वीकार्य समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिवक्ता केवल अपने पक्षकार के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि वे पक्षकार को उपलब्ध सभी वैधानिक और प्रभावी समाधान विकल्पों से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मध्यस्थता केन्द्र प्रभारी ने बताया समाधान की असली ताकत क्या है…
बैठक में मध्यस्थता केन्द्र प्रभारी, दुर्ग अनिष दुबे ने भी अधिवक्ताओं को संबोधित किया।उन्होंने मध्यस्थता की व्यावहारिक प्रक्रिया और उसके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि मध्यस्थता में किसी पक्ष को हराना लक्ष्य नहीं होता। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने प्रकरणों में मध्यस्थता की संभावनाओं को पहचानें और उपयुक्त मामलों में पक्षकारों को इसके लाभों के बारे में समझाएं। इसीलिए बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मध्यस्थता को केवल एक कानूनी प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि समाधान की संस्कृति के रूप में विकसित किया जाए।
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