उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या कर सेवानिवृत्त शिक्षकों को पहले से मिल रही पेंशन से भी किया वंचित…

TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
अनुदानित शिक्षक संघ, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई ने छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त uशिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन बंद किए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
सेवानिवृत्त प्राध्यापक संघ के प्रो डी एन शर्मा और डॉ आर पी अग्रवाल तथा संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा और सचिव डॉ. अनुराग पांडेय ने कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत और मनमानी व्याख्या करते हुए सैकड़ों सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पहले से प्राप्त पेंशन से भी वंचित कर दिया है।
उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत और मनमानी व्याख्या करते हुए सैकड़ों सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पहले से प्राप्त पेंशन से भी वंचित…
मंत्रिपरिषद के कार्यसूची-विवरण में उच्च शिक्षा विभाग का प्रस्ताव स्पष्ट रूप से यह था कि शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को जिस वेतनमान से वे सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी वेतनमान के अनुरूप पेंशन एवं उपदान प्रदान किया जाए।



मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को “नियमों में प्रावधान तथा लोकहित में न होने के कारण” अमान्य किया तथा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों में उचित विधिक पैरवी करने का परामर्श दिया।
मंत्रिपरिषद के निर्णय में कहीं भी पहले से स्वीकृत और वर्षों से दी जा रही पेंशन को बंद करने का निर्देश नहीं है…
इस दौरान डॉ.सुधीर शर्मा, अध्यक्ष अनुदानित शिक्षक संघ कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय,भिलाई और डॉ.अनुराग पांडेय,सचिव अनुदानित शिक्षक संघ कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने जानकारी देते बताया की इस निर्णय का सीधा और स्वाभाविक अर्थ केवल इतना है कि संबंधित प्रस्ताव के अनुसार संशोधित अथवा अंतिम वेतनमान के आधार पर पेंशन देने की नई व्यवस्था को स्वीकृति नहीं दी गई।
मंत्रिपरिषद के निर्णय में कहीं भी पहले से स्वीकृत और वर्षों से दी जा रही पेंशन को बंद करने का निर्देश नहीं है…
इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर न केवल सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वर्तमान पेंशन रोक दी, बल्कि कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों की पेंशन एवं ग्रेच्युटी की पात्रता भी समाप्त कर दी। यह कार्रवाई मंत्रिपरिषद के वास्तविक निर्णय की सीमा से परे और उसकी गंभीर गलत व्याख्या प्रतीत होती है।
पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी दी जाती रही है…
संघ ने कहा कि अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को राज्य शासन द्वारा लगभग 37 वर्षों से पेंशन एवं ग्रेच्युटी प्रदान की जा रही है। 26 अक्टूबर 2010 के शासनादेश के अनुसार उन्हें पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी दी जाती रही है।
शिक्षकों की मांग केवल यह थी कि जिस वेतनमान में वे सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी के अनुरूप उनकी पेंशन निर्धारित की जाए। सरकार इस पर समान न्याय प्रक्रिया और सहानुभूति के आधार पर विचार करें।
प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने कहा कि पेंशन कोई दया या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि जीवनभर की सेवा के बदले प्राप्त सामाजिक सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन का आधार है।
सेवानिवृत्त शिक्षक एवं कर्मचारी वृद्धावस्था में चिकित्सा, दवाइयों तथा पारिवारिक दायित्वों के लिए इसी पेंशन पर निर्भर हैं। जुलाई एवं अगस्त माह की पेंशन का भुगतान नहीं होना और सितंबर से पेंशन बंद कर देना उनके सामने गंभीर आर्थिक एवं मानवीय संकट उत्पन्न करता है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पूर्ववत मिल रही पेंशन अविलंब बहाल की जाए…
सेवानिवृत्त और सेवारत अनुदानित शिक्षक और कर्मचारी संघ ने राज्य शासन से मांग की है कि—मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या पर आधारित 1 सितंबर 2026 तथा 11 सितंबर 2026 के आदेश तत्काल वापस लिए जाएँ।
सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पूर्ववत मिल रही पेंशन अविलंब बहाल की जाए। जुलाई एवं अगस्त 2026 सहित समस्त लंबित पेंशन का तत्काल भुगतान किया जाए। कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन तथा ग्रेच्युटी की पात्रता पूर्ववत सुरक्षित रखी जाए।
संघ ने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि शासन मानवीय संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाए। यदि वर्तमान पेंशन शीघ्र बहाल नहीं की गई, तो प्रभावित शिक्षक एवं कर्मचारी लोकतांत्रिक आंदोलन तथा उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
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