TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गया नगर में गुरुवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसमें भारत शेल्टर फाइनेंस कॉरपोरेशन (इंडिया शेल्टर फाइनेंस कॉरपोरेशन) भिलाई शाखा, पचपेडी नाका, रायपुर के कथित कर्मचारियों पर बिना वैध अधिवक्ता नामांकन और अधिकृत दस्तावेजों के बेदखली कार्रवाई करने का आरोप लगा है।
शिकायतकर्ता श्रीमती खोरबाहरीन बाई (पति प्यारेदास मानिकपूरी) और आवेदक रवि मजिन पुरी के अनुसार, घटना 24 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे घटी।



शिकायत में कहा गया है कि उक्त पते पर एक महिला और दो अन्य व्यक्ति बैंक कर्मचारी होने का दावा करते हुए पहुंचे। उनके पास नायब तहसीलदार का बेदखली वारंट था, जिसका प्रकरण क्रमांक एमजेसी सीआरआई/1682/2026 बताया गया।
निवासियों और मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर जब उनसे वकालत का रजिस्ट्रेशन और बैंक का अधिकृत पत्र मांगा गया…

साथ में दो महिला पुलिसकर्मी सहित कुल सात पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। आसपास के निवासियों और मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर जब उनसे वकालत का रजिस्ट्रेशन और बैंक का अधिकृत पत्र मांगा गया, तो वे कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाए।
इसके बाद सभी को सिटी कोतवाली ले जाया गया, जहां पूछताछ में भी पुख्ता सबूत नहीं मिल सके। तत्पश्चात जिला अधिवक्ता संघ के कार्यालय में मामले की जांच करवाई गई। संघ द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति का किसी भी न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण नहीं पाया गया। संघ की अनुशंसा पर उन्हें उचित कार्रवाई के लिए वापस पुलिस थाने भेज दिया गया।
फाइनेंस कंपनी को गलत दस्तावेज पेश कर खुद को वकील साबित करते…

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ऐसे व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के वकील बनकर न्यायालय और अन्य स्थानों पर व्यवसाय कर रहे हैं। वे फाइनेंस कंपनी को गलत दस्तावेज पेश कर खुद को वकील साबित करते हैं, जिससे कंपनी की छवि खराब होती है, दिशानिर्देशों का पालन नहीं होता और वैध अधिवक्ताओं को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने ऐसे फर्जी वकीलों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध बताई गई है। स्थानीय निवासियों और मीडिया की मौजूदगी से मामला सार्वजनिक हो गया, जिसके बाद पुलिस प्रशासन भी जांच में शामिल हुआ।
अभी तक कंपनी या संबंधित व्यक्तियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा आगे की जांच जारी रखने और दस्तावेजों की वैधता की जांच करने की संभावना है।
मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए…

यह घटना वित्त कंपनियों द्वारा वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी औपचारिकताओं के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अधिवक्ता संघ और पुलिस प्रशासन से अपेक्षित है कि वे ऐसे मामलों में सख्ती बरतें, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो और कानूनी व्यवस्था का दुरुपयोग न हो।
दुर्ग और रायपुर क्षेत्र में ऐसी घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं, जहां अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा वसूली के नाम पर दबाव बनाने के आरोप लगते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए। स्थानीय प्रशासन और अधिवक्ता संघ इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। आगे की कार्रवाई पुलिस जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
घटना के बाद दुर्ग सिटी कोतवाली में भी काफी गहमागहमी की स्थिति बनी रही। बताया जा रहा है कि गिरधारी नगर, गया नगर और पानी टंकी क्षेत्र के बड़ी संख्या में स्थानीय लोग थाने पहुंचे। मामले को लेकर पुलिस से निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा पुलिस अधीक्षक दुर्ग के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है…
पुलिस जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विशेष रूप से संबंधित व्यक्ति का अधिवक्ता पंजीयन, फाइनेंस कंपनी की ओर से जारी प्राधिकरण पत्र तथा बेदखली कार्रवाई से संबंधित न्यायालयीन दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द सिटी रिपोर्ट न्यूज़ मामले में सभी पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
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