
TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय भिलाई नगर कि वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय में आज अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य वक्ता सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में वाणिज्य के पूर्व अधिष्ठाता डॉ० राकेश ढांड जी उपस्थित हुए उन्होंने अपने उद्बोधन में छात्रों को भारतीय संस्कृति का बोध कराते हुए कहा कि सबसे पहले हम अपने मातृभाषा का सम्मान करें, हम केवल यह नारा लगाते रहेंगे की “सबसे बढ़िया छत्तीसगढ़िया” तो नारा तो लगता रहेगा






लेकिन हम दो छत्तीसगढ़ी जाने वाले सार्वजनिक स्थानों पर यदि छत्तीसगढ़ी में बात नहीं करते हैं तो छत्तीसगढ़ी भाषा अपने मूल संस्कृति से विस्मृत होकर केवल इतिहास बन जाएगा।
यदि हम अपनी संस्कृति को छोड़ते जाएंगे तो निश्चित ही एक दिन हमारा पतन निश्चित है…

इसी कड़ी को उन्होंने छात्र-छात्राओं को सरल शब्दों में विभिन्न उदाहरणों व प्रश्नों के माध्यम से समझाते हुए पूछा कि आप सभी हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में क्यों नहीं करते? यदि हम अपनी संस्कृति को छोड़ते जाएंगे तो निश्चित ही एक दिन हमारा पतन निश्चित है।
आज तक जो “भारत” भारत बना हुआ है उसके पीछे न जाने कितने लोगों की कुर्बानियां है जो भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अपनी जान गवा बैठे हैं हमें उनके बलिदान को स्मरण करते हुए यह हमेशा याद रखना चाहिए की हम वैज्ञानिकता को तो अपनाएं लेकिन अपनी संस्कृति से भी जुड़े रहें।
उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि आप कितने लोग हैं जो अपने गोत्र को जानते हैं? हमारा गोत्र यह बताता है कि हम किस ऋषि या देव से सम्बन्धित हैं। पहले हमारी पहचान कर्म के आधार पर होती रही है जिसमें जाति धर्म का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था हमें मिलकर फिर से उसी कर्म प्रधान देश को गढ़ना है व हमें भारतीय होने में गर्व महसूस करना है।
पहले आप भारतीय हैं व भारतीयता आपके वेशभूषा,भाषा,व्यवहार में झलकना चाहिए…
कोई पूछे कि आप कौन हो तो सबसे पहले बताइए कि मैं भारतीय हूं चाहे आप किसी भी धर्म के हो किसी भी प्रांत के हो किसी भी भाषा के बोलने वाले हो लेकिन सबसे पहले आप भारतीय हैं व भारतीयता आपके वेशभूषा,भाषा,व्यवहार में झलकना चाहिए , आप ही हमारी भारतीय संस्कृति को प्रगति पर ले जाकर पुनरूत्थान कर सकते हैं।
आज के कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के ऊर्जावान प्राचार्य डॉ० विनय शर्मा व मुख्य वक्ता डॉ० राकेश ढांड जी तथा प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० हरीश कुमार कश्यप ने मॉं सरस्वती पूजन व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके पश्चात स्वागत भाषण डॉ० विनय शर्मा, प्राचार्य ने दिया जिसमें उन्होंने युवाओं को आवाहन किया कि आप छात्र जीवन जो जी रहे हैं यह आपका स्वर्णिम समय है इस स्वर्णिम समय को आप छात्र जीवन कैसा होना चाहिए आप अपने आप को लक्ष्य हासिल करने में पूरा समय दीजिए।
2047 में हमें अपनी संस्कृति के साथ भारत को एक विकसित राष्ट्र भी बनाना है…
आप पढ़ाई लिखाई के साथ खेलकूद व ज्ञान विज्ञान में अपनी रुचि को बनाकर रखें और उसे अपनी संस्कृति के साथ निभाते आगे बढ़ते चले जाएं क्योंकि आने वाला समय या आने वाला भारत आप लोग का भारत होगा युवाओं का भारत है और 2047 में हमें अपनी संस्कृति के साथ भारत को एक विकसित राष्ट्र भी बनाना है ।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के प्राध्या० डॉ० रविश सोनी द्वारा किया गया व धन्यवाद ज्ञापन डा० हरीश कुमार कश्यप द्वारा किया गया। इस अवसर पर महिला महाविद्यालय से प्रो० डॉं० एम० माधवी व महाविद्यालय के वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय के प्राध्यापक डॉ० निशा,शिवानंद, अमित, योगेश, जितेन्द्र, कोमेश, आदित्य , आफ़रीन, श्रद्धा, विमल व रामेश्वर सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित हुए।
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