डस्टबीन और सुलभ शौचालयों में लगे गांधीजी के चिन्ह (लोगो) को हटाकर देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सम्मान बढ़ाने लड़ी गई थी कानूनी लड़ाई….

हाईकोर्ट बिलासपुर ने याचिकाकर्ता की प्रशंसा की और इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील को खर्च स्वरूप 50 हजार रूपये देने का दिया था आदेश….
भिलाई नगर पालिक निगम की अनदेखीं के चलते अभी भी कचरा कलेक्शन कर रही वाहनों पर छपा हुआ हैं महात्मा गांधी जी का चश्मा वाला लोगों….
Thecityreportnews@bhilai. डस्टबीन और सुलभ शौचालयों में लगे गांधीजी के चिन्ह (लोगो) को हटाकर देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सम्मान बढ़ाने लड़ी गई कानूनी लड़ाई और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना का नजारा अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार में भी देखने को मिल रहा है। भिलाई नगर निगम की अनदेखीं के चलते अभी भी कचरा कलेक्शन कर रही वाहनों पर छपा हुआ हैं महात्मा गांधी जी का चश्मा वाला लोगो…स्वच्छ एवं सुंदर भिलाई बनाने भिलाई निगम स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के मद्देनजर भिलाई निगम जागरूकता को लेकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर वार्ड, मोहल्ले एवं प्रमुख मार्केट क्षेत्रों में नुक्कड़ और नृत्य का आयोजन स्वच्छता के प्रति लोगो को जागरूक कर रही है। गौरतलब है कि महापौर नीरज पाल और निगमायुक्त रोहित व्यास ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में भिलाई को पहले पायदान पर लाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं और स्वयं भी आयुक्त सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर लोगों से फीडबैक ले रहे हैं। वही भिलाई निगम की अनदेखी के चलते भिलाई निगम में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने जा रही वाहन में महात्मा गांधी जी का चश्मा अभी भी छपा हुआ है। जिसे हटाने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यमंत्री बदरूददीन कुरैशी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी आवाज उठाई थी।

2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन का एलान किया गया था। देश को स्वच्छ और खुले में शौचमुक्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया यह मिशन वर्ष 2019 तक पूर्ण होना था। इसके लिए केन्द्र सरकार ने युद्ध स्तर पर काम शुरु किये। समूचे देश में सफाई के नाम पर विभिन्न तरह के नारा स्लोगनों से लेकर सरकारी कार्यक्रमों को सुनिश्चित किया गया। इसी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के चिन्ह के तौर पर चश्मा, चरखा, फोटो आदि को मिशन के (लोगो) के तौर पर इस्तेमाल करने के आदेश जारी किए गए। वही स्वच्छता मिशन के तहत पूरे भारत देश में 5 दिसंबर 2014 को भारत सरकार की पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की सचिव विजय लक्ष्मी जोशी ने भारत संघ के अधीन समस्त राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर यह अधिसूचित किया कि स्वच्छ भारत मिशन को लोकप्रिय बनाने और जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए मिशन के (लोगो) में गांधी जी के चिन्हों का उपयोग कार्यालयीन तौर पर की जाए। राज्यों की सरकारें अपने-अपने राज्यों के विभागों में ऑफिशियल स्टेशनरी कार्यालयीन लेखन सामग्रियों पर (लोगो)अंकित किए जाए। साथ ही दीवारों से लेकर कॉरीडोर, शासकीय भवनों, प्रसिद्ध स्थलों तक मिशन के (लोगों) का अंकन कर स्वच्छता मिशन को गतिमान करें।

इसके साथ ही केन्द्र सरकार के उक्त पत्र के आधार पर समस्त राज्य सरकारों ने भी उसी तर्ज पर अपने अधिनस्थ समस्त विभागों को निर्देश पत्र भी जारी कर दिया। जिसके बाद देखा गया कि अदूरदर्शी एवं बंद अमल तथा गलत मानसिकता के लोगों द्वारा इसे तमाशा बना दिया और गांधी जी की फोटुओं वाले (लोगो) का धड़ल्ले से दुरुपयोग किया। गांधीजी के चाम चरखे, छायाचित्र आदि जैसे चिन्ह उन स्थलों पर अंकित होते थे जो अशोभनीय था। चाहें शौचालयों और कूड़ेदानों में गांधीजी के चिन्ह वाले (लोगो) जहां गंदगी बिखरी पड़ी है। इसी प्रकार शासकीय भवनों, केन्द्र सरकार के द नगरीय निकाय के कार्यालयों, पंचायतों, स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों के सुलभ शौचालयों,मूत्रालयों, चौक-चौराहों पर कचरादानों और मलिन स्थलों पर गांधीजी के चिन्ह (लोगों) को दर्शाया जाता रहा है था । जिसको लेकर पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने अपनी आवाज बुलंद की और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में इसे लेकर एक जनहित याचिका डब्लूपीपीआईएल नंबर ११७ ऑफ २०१६ तारीख 08.12.2016 को दायर कर तथ्यात्मक सच्चाई मय दस्तावेजों के साथ माननीय न्यायालय के समक्ष रखकर स्पष्ट कर कहा था कि केन्द्र सरकार द्वारा की जा रही नादिरशाही पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए वर्ना यह नजीर देशहित में उचित नहीं होगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को लिखा था पत्र

पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश 23.03.2017 की जानकारी तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व वर्तमान के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी रुक्का-रुक्का पता था। श्री भूपेश बघेल ने उस वक्त प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को पत्र लिखकर आगाह किया था जिसके आधार पर समूचे प्रदेश में सुलभ शौचालयों से गांधी जी के स्केचेस और लोगो हटाने की कार्यवाही हुई।उन्होनें पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के तहत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के तस्वीर एवं चरखे का दुरुपयोग नही किये जाने का स्पष्ट आदेश 6 जनवरी 2017 को जारी किया गया है, किन्तु देखने में आ रहा है कि छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक स्तर पर इस आदेश का परिपालन नहीं किया जा रहा है जो माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अवहेलना है।
विद्वान न्यायाधीशों ने भी थपथपाई थी मेरी पीठ
पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान को लेकर मेरे द्वारा उठाई गई आवाज और उनके संज्ञान में इस मामले को लेकर आने के लिए विद्वान न्यायाधीशों ने मेरी पीठ थपथपाई थी और उस वक्त 30 मार्च 2017 के डबल बैच के चीफ जस्टिस थोथाथील बी.राधाकृष्णन और प्रीतिंकर दिवाकर जज द्वारा इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने के लिए याचिकाकर्ता की प्रशांसा की थी और साथ ही कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश देकर कहा था कि इस मामले के खर्च स्वरूप वह 3 सप्ताह में 50 हजार रू.याचिकाकर्ता के वकील को प्रदान करें।


इसके साथ ही इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने पत्र के माध्यम मे विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी और मंत्री नेताओं से बात कर अपनी कड़ी आपत्ति जाहिर की थी…वहीं इस मामले को लेकर पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कलेक्टर के संज्ञान में मामला लाने की बात कहीं …..
