सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ महिला कर्मी से कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप में डॉ.एस के जामगड़े पर दोष सिद्ध पाया गया था…
द सिटी रिपोर्ट न्यूज़@दुर्ग/रायपुर
छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा एक जैसे केश में फैसला करते दोहरा मापदंड नजर आया। जिसमें एक पर तो हाल ही कार्यवाही की गई मगर वही दूसरी तरफ दोष सिद्ध पाए गया डॉक्टर एस के जामगड़े पूरी आजादी के साथ भिलाई के सुपेला अस्पताल में अपना समय बिता रहा है।
आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा कलेक्टर, जिला गरियाबंद की अनुसंशा पर सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय गरियाबंद के विरूद्ध दुर्व्यव्हार एवं मानसिक प्रताड़ना किये जाने के संबंध में की गई शिकायत की जांच हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत गरियाबंद की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर जांच कराई गई।
दुर्ग जिले के स्वास्थ्य विभाग विशाखा कमेटी की जॉच के बाद भी अब तक कार्यवाही आधी अधूरी…
जिसमे जांच प्रतिवेदन 11.11.2024 में अंकित निष्कर्ष अनुसार डॉ. एम.के.हेला, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय गरियाबंद के द्वारा महिला चिकित्सा अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया गया है। उनके द्वारा जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है. वह अभद्रता की श्रेणी में आता है, उक्त कृत्य कदाचरण की परिश्रेणी में आता है तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के सर्वथा विपरीत हैं।
अतः परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, राज्य शासन, एतद्वारा डॉ. एम.के. हेला, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय गरियाबंद को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित की कार्यवाही की गई।
यौन उत्पीड़न मामले में विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में डॉ.एस के जामगड़े पर हुआ था दोष सिद्ध…
बही छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के दोहरे मापदंड के चलते दुर्ग सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ महिला कर्मी से कार्य स्थल में यौन उत्पीड़न के आरोप में डॉ.एस के जामगड़े पर दोष सिद्ध पाया गया था जिसमे विशाखा समिति की रिपोर्ट में उन्हें दोषी बताया गया था। इस मामले में दो गवाहों के अलावा 11 अन्य कर्मियों के बयान लिए गए थे।
जिसमे डॉ.जामगड़े को भी अपना पक्ष रखने के लिए मौका दिया गया था जिसमे उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था लेकिन गवाह सहित सभी सहकर्मियों के बयान के आधार पर उन्हें दोषी पाया गया था।
जिस पर अब तक कार्रवाई आधी अधूरी पड़ी हुई है। वही मिली जानकारी के अनुसार तत्त्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने शासन को कार्यवाही रिपोर्ट भेजने में लेट लतीफी भी किया गया था। जो पिछले एक वर्ष से जांच और कार्यवाही के लिए दबी फाइल पर अब तक कोई भी आदेश पारित नहीं हो पाया।
वही अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग इस दिशा में किस तरह से पेंडिंग पड़े इस मामले पर संज्ञान लेगा।
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