“श्यामा” के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, देर रात तक गूंजती रहीं रवीन्द्र संगीत की मधुर स्वर-लहरियां…

The City Report News@Durg/Bhilai
विश्वकवि गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के पावन अवसर पर रविवार संध्या हुडको कालीबाड़ी परिसर श्रद्धा, संस्कृति और संगीत की सुरमयी छटा से आलोकित हो उठा।
“रवीन्द्र निकेतन, हुडको, भिलाई” द्वारा आयोजित भव्य “रवीन्द्र जयंती समारोह” में साहित्य, संगीत, नृत्य और भावनाओं का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध बनाए रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ शेफाली दास द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया। तत्पश्चात गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। दीपशिखाओं की दिव्य आभा और रवीन्द्र संगीत की मधुर स्वर-लहरियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा से भर दिया।
बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिकाओं ने अपनी सहज अभिव्यक्ति, लयात्मक प्रस्तुति और मनोहारी मुद्राओं से दर्शकों का मन मोह लिया…

इसके उपरांत रवीन्द्र निकेतन की महिला सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक गीत एवं भावपूर्ण काव्य-पाठ ने समारोह को साहित्यिक ऊष्मा और सांस्कृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण कर दिया।
बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिकाओं ने अपनी सहज अभिव्यक्ति, लयात्मक प्रस्तुति और मनोहारी मुद्राओं से दर्शकों का मन मोह लिया।
रंग-बिरंगी वेशभूषा, मधुर संगीत और सजीव अभिनय ने मानो गुरुदेव की रचनात्मक चेतना को साकार कर दिया। सभागार बार-बार तालियों की गूंज से गूंजायमान होता रहा।
समारोह का मुख्य आकर्षण गुरुदेव की कालजयी नृत्य-नाटिका “श्यामा” का विशेष मंचन रहा। “रवीन्द्र निकेतन, हुडको” के सचिव रूपक दत्ता एवं कला साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ (कवच) के सचिव बबलू विश्वास के विशेष अनुरोध पर सुप्रसिद्ध निर्देशिका एवं कलाकार अनन्या बर्मन के निर्देशन में प्रस्तुत इस नृत्य-नाट्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

संगीत, नृत्य और अभिनय की त्रिवेणी ने प्रेम, वेदना और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों एवं संस्कृति-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन समिति ने कहा कि गुरुदेव की रचनाएं आज भी मानवता, प्रेम और विश्वबंधुत्व का अमर संदेश देती हैं तथा नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
श्रद्धा, सौंदर्य और सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि रवीन्द्र दर्शन की जीवंत अनुभूति बन गया, जिसकी मधुर स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के मन में बनी रहेंगी।
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