छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार गुप्त ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की लगाई गुहार…

द सिटी रिपोर्ट न्यूज@दुर्ग
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार गुप्त ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर उनका ध्यान लोकतंत्र और संविधान पर आसन्न खतरे की ओर आकर्षित करते हुए कहा है कि भारत निर्वाचन आयोग के सहयोग से राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल देश में पार्टी की तानाशाही स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए व्हीप और दलबदल कानून को राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
मंच के नेता ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में कहा है कि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं का गठन निर्धारित चुनाव क्षेत्र में पंजीकृत मतदाताओं द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों से होता है और जिसे निर्वाचित प्रतिनिधियों के बहुमत का विश्वास प्राप्त होता है वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनकर सरकार का गठन करता है संविधान में राजनीतिक दल का कोई स्थान नहीं है।
मंच के नेता ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि वर्तमान लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी जी और भाजपा द्वारा प्रचारित किया जा रहा है कि प्रत्याशी को नहीं मोदी जी का चेहरा और पार्टी का चुनाव चिन्ह को देखकर वोट करें लगभग ऐसा ही प्रचार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य दलों द्वारा भी किया जाता है यह लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर संकट का संकेत है, इसपर भारत निर्वाचन आयोग की चुप्पी से संदेह पैदा होता है कि आयोग और मान्यता प्राप्त दलों के बीच आपसी सांठगांठ है।
पत्र में आगे कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और उसे निर्भीक होकर स्वतंत्र रूप से सदन में अपनी बात रखनी चाहिए लेकिन दलों द्वारा व्हीप जारी करके उन्हें पार्टी के निर्देश के अनुसार आचरण करने के लिए विवश किया जाता है इसी प्रकार जब निर्वाचित प्रतिनिधि को सदन में मतदान करना होता है तब भी उसे दल द्वारा निर्देशित किया जाता है, जनता के द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि यदि दल बदल लेता है तब सदन से उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाती है संवैधानिक प्रावधान के अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधि को सदन से वापस बुलाने का एकमात्र अधिकार उस निर्वाचन क्षेत्र के पंजीकृत मतदाताओं को है लेकिन किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की सदन से सदस्यता समाप्त करने का निर्णय दल की शिकायत पर स्पीकर द्वारा लिया जाता है ऐसा निर्णय लेने से पहले क्षेत्र के पंजीकृत मतदाताओं को विश्वास में लेना जरूरी नहीं समझा जाता है ऐसा असंवैधानिक दलबदल कानून के कारण से है।
पत्र में आगे कहा गया है कि यह राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं जिनके माध्यम से अपराधी तत्व, धन्नासेठ, आदि बड़ी संख्या में सदन का सदस्य निर्वाचित होने में कामयाब हो जाते हैं, उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व भी एड राजकुमार गुप्त ने 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव में 7 मई को तीसरे चरण का मतदान होना है मतदान के 3 दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
