टैगोर की अमर कहानी का मंचन बना संवेदनाओं और रंग-सौंदर्य का अनुपम उत्सव…

TheCityReportNews@Chhattisgarh/Bhilai-Durg
21 जुलाई की शाम प्रगति भवन, सिविक सेंटर, भिलाई में कोलकाता की प्रतिष्ठित रंगसंस्था “थिएटर शाइन” द्वारा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की कालजयी कहानी “द पोस्टमास्टर” का मंचन ऐसा सांस्कृतिक आयोजन बन गया, जिसने दर्शकों को अंत तक भाव-विभोर बनाए रखा।



निर्देशक सुवोजित बंदोपाध्याय के सृजनात्मक निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने अभिनय, संगीत, प्रकाश, दृश्य शिल्प और भावाभिव्यक्ति के अद्भुत सामंजस्य से यह साबित कर दिया कि सशक्त रंगमंच भव्य संसाधनों का नहीं, बल्कि गहरी संवेदना और कल्पनाशील प्रस्तुति का नाम है।
नाटक की शुरुआत से ही कलाकारों ने ऐसा वातावरण रचा कि दर्शक स्वयं को बंगाल के शांत ग्रामीण परिवेश में महसूस करने लगे…

सीमित मंच सज्जा के बावजूद प्रकाश, पार्श्व संगीत, मौन और कलाकारों की प्रभावशाली देहभाषा ने हर दृश्य को जीवंत बना दिया। कई प्रसंग ऐसे रहे, जहाँ बिना संवाद के ही भावनाएँ सीधे दर्शकों के हृदय तक पहुँच गईं।
निर्देशक ने टैगोर की मूल संवेदना को अक्षुण्ण रखते हुए उसे आधुनिक रंगभाषा में रूपायित किया। पोस्टमास्टर और रतन के बीच आत्मीयता, अपनत्व और मानवीय करुणा के रिश्ते को कलाकारों ने इतनी सहजता से निभाया कि पूरा सभागार उनकी भावनात्मक यात्रा का सहभागी बन गया।
समानांतर मंच-संयोजन, प्रभावी कथावाचन, जीवंत संगीत और चित्रात्मक दृश्य-रचना ने पूरी प्रस्तुति को मानो एक गतिशील चित्रकाव्य में बदल दिया…
प्रस्तुति का एक विशेष आकर्षण ग्रेसी चौधरी द्वारा संवाद और कठपुतली (पपेट) के अद्भुत संयोजन से सजी प्रस्तुति रही। उनके सशक्त संचालन ने कथा के भावों को एक नया आयाम प्रदान किया और दर्शकों को नाटक की संवेदनात्मक यात्रा से और अधिक गहराई से जोड़ दिया।
वहीं चित्रकार अनिरुद्ध विश्वास की मंच पर सजीव चित्रकारी ने दृश्यात्मक सौंदर्य का अनूठा संसार रचा। रंगों और रेखाओं के माध्यम से उन्होंने कथा की भावभूमि को मूर्त रूप दिया, जिससे नाटक केवल अभिनय तक सीमित न रहकर चित्र, संगीत, प्रकाश और नाट्यकला के समन्वय से एक समग्र कलात्मक अनुभव बन गया।
प्रस्तुति समाप्त होने के बाद कुछ क्षणों तक सभागार में छाया मौन ही उसकी सबसे बड़ी सफलता का प्रमाण था। इसके बाद देर तक गूंजती तालियों ने कलाकारों और निर्देशक के उत्कृष्ट कार्य को भरपूर सम्मान दिया।
आयोजकों ने कलाकारों की सहमति से पहले शो की समाप्ति के तुरंत बाद बैक-टू-बैक दूसरे शो के मंचन का निर्णय लिया…
दर्शकों का उत्साह इतना अभूतपूर्व रहा कि पहला शो शुरू होने से पहले ही सभागार पूरी तरह हाउसफुल हो गया। बड़ी संख्या में रंगप्रेमी सीट नहीं मिलने के कारण बाहर ही रह गए।
दर्शकों की लगातार मांग और नाटक देखने की तीव्र इच्छा को देखते हुए आयोजकों ने कलाकारों की सहमति से पहले शो की समाप्ति के तुरंत बाद बैक-टू-बैक दूसरे शो के मंचन का निर्णय लिया।
लगातार दो प्रस्तुतियों में कलाकारों ने समान ऊर्जा, ताजगी और संवेदनशीलता के साथ अभिनय कर दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। किसी गंभीर साहित्यिक नाटक के लिए दर्शकों के आग्रह पर एक ही दिन लगातार दो शो का मंचन भिलाई के रंगमंचीय इतिहास की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हो गया।
कार्यक्रम में नरेंद्र कुमार बंछोर (चेयरमैन, सेफी), परविंदर सिंह (पूर्व सचिव, ऑफिसर्स एसोसिएशन), श्रीमती रजनी सिन्हा (अध्यक्ष, गीतवीतान कला केंद्र, भिलाई), शक्तिपद चक्रवर्ती (अध्यक्ष, कला साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़–कवच), भूपेंद्र कुलदीप (कुलसचिव, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय), डॉ. रमेश कुमार सोनवणे (संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग), डॉ. श्रद्धा मिश्रा (साहित्यकार), अमित घोष (डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर, दुर्ग संभाग), चंद्रा बैनर्जी, जयप्रकाश नायर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रायपुर, राजनांदगांव और आसपास के शहरों से आए रंगकर्मियों, साहित्यप्रेमियों और कला-रसिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।
‘द पोस्टमास्टर’ का यह मंचन भिलाई के सांस्कृतिक परिदृश्य में केवल एक नाट्य-प्रस्तुति नहीं, बल्कि साहित्य, संगीत, अभिनय, चित्रकला और मानवीय संवेदनाओं का ऐसा दुर्लभ संगम बनकर उभरा, जिसकी स्मृति लंबे समय तक रंगप्रेमियों के मन में जीवित रहेगा।
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